'मानवाधिकार उल्लंघन मामलों की जाँच'

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लीबिया में कथित तौर पर मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र की टीम त्रिपोली पहुँच रही है.

फ़रवरी में वहाँ शुरु हुए संघर्ष के बाद से कई बार मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लग चुके हैं.

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने विशेष जाँच दल का गठन किया था.

तीन सदस्यों वाले इस दल का कहना है कि वो कथित प्रताड़ना के मामलों की जाँच करेगा. इसमें वो मामले भी शामिल हैं जहाँ लीबिया सरकार ने विद्रोहियों और नैटो पर उल्लंघन का आरोप लगाया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि टीम की पहली प्राथमिकता कर्नल गद्दाफ़ी के सैनिकों द्वारा कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच करना ही है.

संयुक्त राष्ट्र दल को अपनी रिपोर्ट जून में देनी है. हालांकि इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कोर्ट से भी कहा है कि वो लीबिया में कथित युद्ध अपराधों की जाँच करे.

मिसराता पर हमला

इस बीच गद्दाफ़ी के सैनिकों ने विद्रोहियों के नियंत्रण वाले मिसराता पर बमबारी की है ताकि इस पर कब्ज़ा किया जा सके.

रिपोर्टों के मुताबिक बंदरगाह पर मिसाइल से हमला हुआ जिसमें तीन लोग मारे गए हैं. हिंसाग्रस्त इलाक़े से भागने के लिए लोग बंदरगाह का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.राहत सामग्री लेकर आ रहा एक जहाज़ बंदरगाह में प्रवेश नहीं कर सका.

मिसराता को पिछले दो महीनों से गद्दाफ़ी के सैनिकों ने घेरा हुआ है. शहर के कई हिस्सों में न पानी है और न बिजली.

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि लड़ाई में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. जहाज़ों के ज़रिए घायलों को बेनगाज़ी लाया जा रहा है.

हालांकि लीबिया सरकार इस बात से इनकार करती है कि उसने मिसराता पर अंधाधुंध गोलीबारी की है.

इस बीच अमरीका ने लीबिया पर लगाए प्रतिबंधों में कुछ ढील दी है. इस वजह से विद्रोही उन इलाक़ों से तेल बेच पाएँगे जो उनके नियंत्रण में है- जब तक कि निर्यात से विपक्षी राष्ट्रीय परिषद को फ़ायदा हो.

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