लोबसाँग साँगे चुने गए 'प्रधानमंत्री'

  • 27 अप्रैल 2011
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Image caption लोबसाँग साँगे को मतदान में 55 फ़ीसदी मत मिले हैं.

तिब्बत की निर्वासित सरकार को उसका 'प्रधानमंत्री' मिल गया है. अमरीका में हावर्ड यूनिवर्सिटी में अध्यापक के तौर पर काम करने वाले लोबसाँग साँगे को 'प्रधानमंत्री' चुना गया है.

वे तिब्ब्तियों का रानजीतिक नेतृत्व करेंगे जबकि दलाई लामा आध्यात्मिक नेतृत्व करते रहेंगे.

विश्व भर में रहने वाले तिब्बतियों ने प्रधानमंत्री चुनने के लिए मतदान किया था. लोबसाँग साँगे को 55 फ़ीसदी मत मिले हैं. उन्होंने दो अन्य उम्मीदवारों तेनज़िन टेथॉंग और ताशी वांगडी को हराया.

दलाई लामा ने मार्च में कहा था कि वे तिब्बत आंदोलन की बागडोर नई पीढ़ी को सौंपना चाहते हैं.लोबसाँग साँगे का जन्म भारत में हुआ था लेकिन अब वह अमरीका में रहते हैं.

तिब्बत की निर्वासित सरकार को कोई भी देश मान्यता नहीं देता है.

नौ मार्च 1959 को तिब्बतियों ने चीन के ख़िलाफ़ विद्रोह किया था. विफल विद्रोह के बाद कई तिब्बती सीमा पार कर भारत आ गए थे.

तब से हज़ारों तिब्बती धर्मशाला में रह रहे हैं और दलाई लामा तिब्बती लोगों की निर्वासित सरकार के मुखिया रहे हैं.

दलाई लामा कहते रहे हैं कि वह तिब्बत के लिए आज़ादी नहीं बल्कि अर्थपूर्ण स्वायत्तता चाहते हैं.

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