गद्दाफ़ी ने की समझौते की पेशकश

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कर्नल गद्दाफ़ी ने नैटो सुरक्षाबल के साथ समझौते की पेशकश करते हुए कहा है कि लीबिया पर हो रहे हवाई हमलों को रोक दिया जाए.

देर रात सरकारी टेलिविज़न पर जारी अपने बयान में गद्दाफ़ी ने कहा कि उन्हें युद्ध-विराम मंज़ूर है बशर्ते यह सभी पक्षों पर लागू हो. लेकिन एक दफ़ा फिर उन्होंने दोहराया कि वो अपना पद नहीं छोड़ेगे.

फ़्रांस, ब्रिटेन और अमरीका को सीधे मुख़ातिब करते हुए गद्दाफ़ी ने कहा कि अगर ये तीनों देश यही चाहते हैं तो वो इन देशों की तेल कंपनियों के साथ संधि करने को तैयार हैं.

गद्दाफ़ी ने इन देशों से अपील की कि वो हवाई हमले करना बंद कर दें.

उनकी सरकार का विरोध कर रहे विद्रोहियों को विदेशी आतंकवादी क़रार देते हुए उन्होंने साफ़ कहा कि वो अपनी सत्ता नहीं छोड़ेगे.

सरकार की ओर से इससे पहले भी युद्ध-विराम की पेशकश की जा चुकी है हालांकि या तो सरकार ने उन पर अमल नहीं किया या विद्रोहियों नें उन्हें नहीं माना.

इससे पहले लीबियाई सरकार ने कहा था कि विद्रोहियों को अपने हथिहार डालने और उसके बदले ‘अपराध क्षमा’ के लिए चार दिन का समय दिया जाता है. इसके बावजूद भी अगर विद्रोही टिके रहे तो उन्हें 'घमासान युद्ध' का सामना करना होगा.

सरकार पहले ही कह चुकी है कि मिसराता शहर की ओर आने वाले किसी भी जलपोत को अब समुद्र मार्ग से शहर में घुसने की इजाज़त नहीं दी जाएगी और सेना से घिरे मिसराता शहर में प्रवेश के लिए राहतकार्यों में जुटे संगठनों को अब ज़मीनी रास्तों का इस्तेमाल करना होगा.

'अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन'

मूसा इब्राहिम ने कहा कि सरकार यह साबित कर चुकी है कि मिसराता शहर में विद्रोहियों को इन जलपोतों के ज़रिए हथियार मिल रहे हैं.

उन्होंने कहा, '' हम किसी भी रुप में जलमार्ग के ज़रिए विद्रोहियों कर हथियार नहीं पहुंचने देंगे. बंगरगाहों के ज़रिए मिसराता में घुसने की सभी कोशिशों को रोकने के लिए हमले किए जाएंगे. शहर में घुसने का कारण चाहे जो भी हो.''

ग़ौरतलब है कि इससे पहले नैटो सुरक्षाबल ने कहा था कि गद्दाफ़ी समर्थक सेना ने मिसराता के आसपास बारूदी सुरंगे बिछा दी हैं जो पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है.

इसके जवाब में मूसा इब्राहिम ने कहा है कि उन्हें बारूदी सुरंगे बिछाए जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

तेल संसाधनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण मिसराता शहर पर अब भी विद्रोहियों का कब्ज़ा है. पिछले कई हफ्तों से लीबियाई सेना इस शहर पर कब्ज़े की कोशिश कर रही है और शुक्रवार को भी सेना ने शहर में घुसने की कोशिशें कीं.

लीबिया की राजधानी त्रिपोली में मौजूद बीबीसी संवाददाता इयान पैनल के मुताबिक सरकार भले ही यह दावा कर रही हो कि मिसराता शहर पर उसका कब्ज़ा है लेकि नैटो सेना के दबाव और भारी नुकसान की आशंका से सरकार अबतक यह करने में नाकाम है.

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