विद्रोहियों के गढ़ पर सेना का कब्ज़ा

  • 1 मई 2011
सीरिया मस्जिद इमेज कॉपीरइट afp
Image caption प्रर्दशनकारी अक्सर ओमरी मस्जिद या पास के इलाक़ो में जमा होते थे.

सीरिया में सेना ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को उनके अहम गढ़ डेरा स्थित ओमरी मस्जिद से खदेड़कर उस पर कब़्ज़ा कर लिया है.

सीरिया का दक्षिणी शहर डेरा शहर प्रजातंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों का केंद्र-बिंदु रहा है. पिछले महीने सीरिया की सरकारी मीडिया ने दावा किया था कि मस्जिद के भीतर बंदूक़, ग्रेनेड और गोलाबारूद का ज़ख़ीरा मौजूद है.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सेना के दस्तों ने तोपों के साथ मस्जिद पर धावा बोला.

कहा जा रहा है कि सेना ने मस्जिद की छत पर जवानों को तैनात कर दिया है और इलाके़ के मुख्य स्थानों पर दस्ते बिठा दिए हैं.

इस बीच सीरिया के नए प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार जल्द ही राजनीतिक दलों और मीडिया संबंधी कानूनों में बदलाव करेगी. सीरिया में एकल दल व्यवस्था है और मीडिया पर कड़े नियंत्रण हैं.

कार्रवाई

सुरक्षाबलों ने विद्रोहियों के ठिकानों पर कार्रवाई की शुरूआत शनिवार भोर से ही शुरू कर दी थी और इलाक़े मे भारी गोलाबारी हुई थी. इस फ़ायरिंग में कम से कम चार लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ उन्होंने शहर के पुराने इलाक़े में टैंकों को जाते हुए देखा था.

शहर मे खाने-पीने के सामानों की किल्लत है. लोगों को पीने का पानी मिल पाना भी मुश्किल हो रहा है. फ़ोन और बिजली की सप्लाई काट दी गई हैं.

शुक्रवार को हुए देशव्यापी प्रदर्शनों में कम से कम 60 लोग मारे गए थे. इनमें से आधी मौतें डेरा में हुई थीं.

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मरनेवालों की तादाद इससे कहीं कम थी.

उन्होंने कहा कि मारे गए लोगों मे चार सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे.

'आतंकवादियों के हमले'

सरकारी टेलीविज़न पर कहा गया है कि डेरा और सीरिया के तीसरे बड़े शहर होम्स में "बंदूक़ों से लैस आतंकवादियों" ने सुरक्षा दस्तों पर हमला किया है.

Image caption प्रर्दशनकारियों ने कहा है कि सरकार जितना ज़्यादा दमन करेगी विरोध उतना ही तेज़ होगा.

लोगों का कहना है कि डेरा में शनिवार को और भारी संख्या में सैनिक, बख़्तरबंद गाडियाँ और तोपें भेजी गईं.

लोगों ने ऐतिहासिक ओमरी मस्जिद को सुरक्षाबलों द्वारा घेरे में लिए जाने की बात कही और उसके बाहर की सड़क पर लाशों के पड़े होने की बात भी सामने आ रही थी.

उनका कहना है कि सुरक्षाबलों ने भोर से ही हमला शुरू कर दिया था और वो बंदूकों से चारों ओर फ़ायरिंग कर रहे थे.

बेरूत से बीबीसी संवाददाता ओवेन बेनेट का कहना है कि प्रशासन विदेशी पत्रकारों को वहाँ जाने की इजाज़त नहीं दे रहा है.

जनाज़े

देश के दूसरे इलाकों में शनिवार को कल के हमलों में मारे गए लोगों के जनाज़े का दिन रहा.

हुकुमत ने लोगों से जनाज़ों में ज़यादा भीड़ इकट्ठा न करने की सलाह दी है.

मानवधिकार संस्थाए दावा कर रही है कि मध्य मार्च से जब की देश में प्रजातंत्र समर्थक प्रर्दशन शुरू हुए हैं, 500 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

अधिकारियों ने कहा है कि बंदूक़धारियों के हमले में अबतक 80 जवानों की मौत हुई है.

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