`एयर इंडिया के निजीकरण की साज़िश'

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Image caption एयर इंडिया की घरेलू उड़ानें महज़ 15 फ़ीसदी ही चल रही हैं

एयर इंडिया की पायलटों की हड़ताल के छठवें दिन भी भारत में विमान सेवाएँ बुरी तरह से प्रभावित हैं.

रविवार को एक तरफ एयर इंडिया प्रबंधन ने हड़ताल को फिर गैर कानूनी और एयर लाइन विरोधी बताया तो दूसरी तरफ भाजपा ने सरकारी रवैये को एयर लाइन का निजीकरण करने की साज़िश.

एयर इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक अरविंद जाधव ने राविवार को सभी कर्मचारियों को एक एसएमएस भेज कर कहा, " आप हमें सहयोग करें साथ ही हड़ताल पर गए साथियों काम पर लौट आने के लिए समझाएं. बातचीत नए सिरे से शुरू की जा सकती है."

एयर इंडिया के इस बयान में नरमी कहीं नहीं है और जाधव ने हड़ताल को गैर कानूनी बताया है. एयर इंडियन प्रबंधन ने कहा "पायलट जिन मुद्दों पर हड़ताल कर रहे हैं वो बरसों पुराने हैं और वर्तमान प्रबंधन को उसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता." एयर इंडिया के प्रवक्ता कमलजीत रतन ने बीबीसी को बताया कि एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ाने ठीक चल रही हैं पर घरेलू उड़ानें महज़ 15 फ़ीसदी ही चल रही हैं. "

'सरकार की मंशा गलत'

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सदस्य और पूर्व केन्द्रीय विमानन मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने एयर इंडिया की हालत के लिए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से उत्तर माँगा.

रूडी ने आरोप लगाया कि हालत इस तरह के बनाये जा रहे हैं ताकि इस एयर लाइन का निजीकरण किया जा सके. रूडी ने पूछा, "क्या केंद्र की सरकार ने मन बना लिया है कि वो सोलह हज़ार करोड़ रुपयों के घाटे को छिपाने के लिए, पूरे लूट को छिपाने के लिए पायलटों को दोषी बनाते हुए एयर इंडिया को बंद करना चाहती है?" रूडी ने ये भी आरोप लगाया कि एयर इंडिया के बंद होने से देश में निजी विमानन कंपनियों की चांदी हो जायगी उन्हें अनुभवी पायलटों की ज़रुरत है और यात्रियों की ज़रुरत है और ऐसे मौके की तलाश है जब वो मनचाहा किराया लोगों से वसूल सकें.

भाजपा नेता ने सीधे प्रधानमंत्री से उत्तर माँगा है. कई विशेषज्ञों का कहना है कि एयर इंडिया के ऊपर करदाताओं का पैसा ख़र्च करना अब और जायज़ नहीं है और विमानन क्षेत्र को भी दूरसंचार क्षेत्र और ज़्यादा खोल देना चाहिए ताकि लोगों को सस्ती और बेहतर सेवाएं उपलब्ध हो सकें.

'निजी हित हावी'

विमानन क्षेत्र के एक जानकार और इंडियन एयर लाइंस के एक पूर्व महाप्रबंधक अशोक शर्मा का कहना है, " सरकार कभी एयर इंडिया का निजीकरण नहीं करेगी."

शर्मा ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा " कोई सांसद या मंत्री जेट कंपनी के किसी विमान को मनचाहा कभी नहीं रोक सकता लेकिन एयर इंडिया के साथ ये किया जा सकता है."

शर्मा इस बात से भी इंकार करते हैं कि एयर इंडिया के बाज़ार से हट जाने से हालत बेहतर होंगें.

उन्होंने कहा, "अभी निजी कंपनियों ने गुटबंदी कर के किरायों को कई गुना बढ़ा दिया है. बाद में भी यही होगा."

शर्मा मानते हैं, "किसी नियामक का जेट और किंगफिशर जैसी बड़ी विमानन कंपनियों पर हाथ डालना बड़ा मुश्किल है. जब तक इन कंपनियों को काबू में नहीं लाया जाएगा तब तक हालत मुश्किल ही रहेगें."

शर्मा को एयर इंडिया का भविष्य बुरा ही लगता है.

अब एयर इंडिया और नागरिक विमानन के क्षेत्र के लिए क्या अच्छा है क्या बुरा ये बहस का विषय है.

जो बहस विषय नहीं है वो ये कि हवाई जहाज़ में चलने वाला भारतीय और बेचारा हवाई ज़हाज़ की शक्ल भी ना देख पाने वाला भारतीय कर दाता दोनों इस संकट में क्यों मार खा रहे हैं.

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