धुंआ उडा़ने पर लगी रोक

  • 2 मई 2011
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Image caption चीन में हर साल दस लाख लोगों की मौत सिगरेट पीने से जुड़ी बीमारियों से होती है.

दुनिया के एक तिहाई सिगरेट पीने वालों के देश चीन में अब सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर रोक लगा दी गई है.

चीन में हर साल लगभग दस लाख लोगों की मौत सिगरेट पीने से जुड़ी बीमारियों से होती है और इस प्रतिबंध का उद्देश्य है इस संख्या को कम करना.

लेकिन नए क़ानून की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि इसके तहत उन लोगों के लिए किसी सज़ा का प्रावधान नहीं है जो इसे तोड़ेंगे.

नए क़ानून के तहत रेस्तरां, होटल, रेलवे स्टेशन और सिनेमाघरों में सिगरेट पीने पर रोक लगा दी गई है लेकिन दफ़्तरों में रोक नहीं लगी है.

रेस्तरां और होटल मालिक इस क़ानून से नाखुश हैं क्योंकि उनके कई ग्राहक इस क़ानून को पसंद नहीं करते और शिकायत करते हैं.

दफ़्तरों में रोक नहीं

दफ़्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों को अब अनिवार्य रूप से सिगरेट पीने के ख़तरों के बारे में बताया जाएगा लेकिन अपने डेस्क पर यदि वो धुंआ उड़ा रहे हों तो उसपर प्रतिबंध नहीं है.

शंघाई में पिछले साल ऐसा ही क़ानून लागू किया गया था लेकिन लोगों ने इसकी ज़्यादा परवाह नहीं की.

चीन में अक्सर होटलों और रेस्तरां में यदि आप खाना खा रहे हों तो बगल की टेबल पर लोग सिगरेट पीते हुए नज़र आ जाएंगे.

समझा जाता है कि चीन में सिगरेट के हानिकारक प्रभाव के बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं है.

शोध दर्शाते हैं कि सिर्फ़ 25 प्रतिशत लोगों को इस बारे में पता है कि सिगरेट पीने से उनपर या उनके आसपास के लोगों पर किस तरह के हानिकारक असर हो सकते हैं.

भारत में भी सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने पर रोक है.

महानगरों में ज़्यादातर दफ़्तरों के अंदर सिगरेट पीने पर प्रतिबंध है. रेस्तरां, सिनेमाघर, रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर भी ये प्रतिबंध लागू है.

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