मिस्र ने अलग फ़लस्तीनी राष्ट्र के लिए गुज़ारिश की

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Image caption मिस्र का कहना है कि अमरीका को हमास और फ़तह के बीच हुए समझौते को एक सकारात्मक कदम की तरह देखना चाहिए.

मिस्र के विदेश मंत्री ने अमरीका से एक अलग फ़लस्तीनी राष्ट्र के एलान के लिए समर्थन की मांग की है.

विदेश मंत्री नबील अल अरबी ने कहा है कि अमरीका को फ़लस्तीनी गुटों, हमास और फ़तह, के बीच हाल के दिनों में हुए समझौते को एक सकारात्मक कदम की तरह देखना चाहिए.

ये समझौता मिस्र की मध्यस्थता की वजह से हो पाया है.

उन्होंने अमरीका से गुज़ारिश की है कि वो इसराइल को फिर से एकजुट हुए फ़लस्तीनी आंदोलन के साथ बातचीत के लिए तैयार करे.

काहिरा से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मिस्र का ये बयान उसकी विदेश नीति में एक बड़े बदलाव का सूचक है.

इस शुक्रवार को ही मिस्र ने एलान किया था कि वो गज़ा पट्टी से लगने वाली अपनी सीमा को फिर से खोल रहा है.

मिस्र अबतक हमास के साथ कोई संबंध नहीं रखने की अमरीका और इसराइल की नीति का पालन करता रहा है.

Image caption मिस्र ने इस शुक्रवार को एलान किया कि वो गज़ा पट्टी से लगनेवाली अपनी सीमा को खोल रहा है.

अमरीका और इसराइल हमास को एक आतंकवादी संगठन मानते हैं और उनका कहना है कि वो ऐसे किसी गुट के साथ बातचीत नहीं करेंगे जिसमें हमास की भागीदारी हो.

जबतक होस्नी मुबारक मिस्र के राष्ट्रपति थे तब तक वहां भी इसी नीति का पालन होता था.

लेकिन नई सरकार ने फ़ौरन ही इसराइल से अलग चलने की नीति पर अमल किया है.

मिस्र में इस कदम को काफ़ी लोकप्रियता मिली है लेकिन इसके अपने ख़तरे भी हैं.

अमरीकी कांग्रेस में इसे बिल्कुल ही पसंद नहीं किया जाएगा और अमरीकी कांग्रेस में ही मिस्र के लिए हर साल एक बड़ा अनुदान पैकेज पारित होता है.

पिछले दिनों में आए उथल-पुथल के बाद आर्थिक संकट से निकलने के लिए मिस्र पश्चिमी और खाड़ी देशों से अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग कर रहा है.

और ऐसे में उसे लोक लुभावन विदेश नीति के फ़ायदों और अपनी ज़रूरतों को तोलना होगा.

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