ब्रितानी दूतावास जला, संयुक्त राष्ट्र पर भी हमला

  • 2 मई 2011
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नेटो हमले में कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे की मौत की ख़बर के बाद लीबिया की राजधानी त्रिपोली में उग्र भीड़ ने दूतावासों और उनसे ज़ुड़ी अन्य इमारतों पर हमला किया है.

अमरीकी और इतालवी दूतावासों को निशाना बनाया गया. ब्रिटेन के दूतावास को तो लगभग पूरा ही जला दिया गया है.

संयुक्त राष्ट्र के कार्यालयों पर भी हमला बोला गया और अंदर रखे सामानों को तहस नहस कर दिया गया.

जहां ब्रिटेन ने लंदन में लीबिया के राजदूत को निकालने का एलान किया है वहीं संयुक्त राष्ट्र भी लीबिया से अपने अधिकारियों को हटा रहा है.

त्रिपोली से बीबीसी संवाददाता क्रिस्टियन फ़्रेज़र का कहना है कि सैफ़ अल अरब गद्दाफ़ी की मौत की ख़बर को सुबह कई घंटों तक दबा कर रखा गया.

लेकिन सरकारी बयान के कुछ ही मिनटों के बाद पूरे शहर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.

जलाए गए ब्रितानी दूतावास में कोई कर्मचारी नहीं था क्योंकि लीबिया में ब्रिटेन का एकमात्र प्रतिनिधित्व बेनगाज़ी में है.

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Image caption लीबिया में उग्र भीड़ ने अमरीकी और इतालवी दूतावासों को निशाना बनाया है.

लेकिन ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है.

विदेश मंत्री विलियम हेग ने लंदन में लीबिया के राजदूत को निष्काषित करने का आदेश दिया है.

लीबिया की सरकार ने लूटपाट और आगज़नी पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है और इसका दोष अनियंत्रित भीड़ के माथे पर मढ़ने की कोशिश की है.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र की एक अधिकारी का कहना था कि उनके कार्यालयों को तहस नहस कर दिया गया. ये अधिकारी लीबियाई सरकार के निमंत्रण पर पर्यवेक्षक के तौर पर वहां मौजूद थीं.

उनका कहना था कि उन्हें किसी तरह की सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई और अब संयुक्त राष्ट्र अपने अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों को वहां से हटा रहा है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नेटो के विमानों का निशाना कर्नल गद्दाफ़ी के फ़ौजी परिसर के पास स्थित एक कोठी थी.

इस हमले के बाद सरकारी टेलिविज़न पर चार शव दिखाए गए जिनके बारे में कहा गया कि एक गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल अरब का था और बाकी उनके तीन पोतों का.

वहां धर्मगुरूओं को भी बुलाया गया था.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि संभवत: ये विद्रोहियों की ओर से जताए जाने वाले संदेह को ख़त्म करने कि लिए था कि ये मौत गद्दाफ़ी के परिवारजनों की नहीं है.

नेटो ने कहा है कि उसके निशाने पर फ़ौजी ठिकाने हैं और वो किसी ख़ास व्यक्ति को निशाना नहीं बना रहे.

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