इसराइल-फ़लस्तीनी पक्ष से प्रतिक्रिया

  • 2 मई 2011
हानिया और फ़लस्तीनी प्राधिकरण के नेता इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption हमास ने लादेन को मारे जाने की कड़ी आलोचना की है

फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास ने अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मारने के लिए अमरीका की कड़ी आलोचना की है.

हालांकि फ़लस्तीनी प्राधिकरण ने कहा है कि लादेन की मौत ‘शांति के लिए अच्छी बात’ है.

अमरीका के समर्थक इसराइल ने कहा है कि बिन लादेन की मौत लोकतांत्रिक देशों के न्याय और आज़ादी जैसे मूल्यों की जीत है.

हमास से जुड़े प्रधानमंत्री इस्माइल हानिया ने कहा कि लादेन को मारने का अभियान मुस्लिमों और अरबों के ख़िलाफ़ अमरीकी दमन को जारी रखने की नीति का हिस्सा है.

गज़ा में संवाददाताओं से बातचीत में हानिया ने कहा कि अल क़ायदा के साथ हमास के मतभेद हैं लेकिन वो एक ‘मुस्लिम और अरब योद्धा की हत्या’ की निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि वो प्रार्थना करते हैं कि लादेन की आत्मा को शांति मिले.

हमास लगातार कहता रहा है कि अल क़ायदा के साथ उसके संबंध नहीं रहे हैं और उनका संघर्ष सिर्फ़ इसराइल के ख़िलाफ़ है.

हालांकि फ़लस्तीनी प्राधिकरण की प्रतिक्रिया इससे अलग रही है. प्राधिकरण को पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है.

प्राधिकरण के प्रवक्ता घसन खातिब का कहना था, ‘‘ लादेन की मौत पूरी दुनिया में शांति के लिए अच्छी है लेकिन सबसे ज़रुरी बात है कि जिस तरह के हिंसात्मक तौर तरीकों का प्रसार लादेन ने किया, पूरी दुनिया उससे भी बाहर निकले.’’

उल्लेखनीय है कि जब 11 सितंबर को अमरीका पर हमले हुए थे तो फ़लस्तीन में कुछ लोगों को खुशियां मनाते हुए देखा गया था. गज़ा पट्टी में तो हमले के समर्थन में बड़ी रैलियां हुई थीं.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतान्याहू ने लादेन की मौत पर कहा कि ये लोकतांत्रिक देशों के आज़ादी और न्याय जैसे मूल्यों की जीत है.

इसराइली राष्ट्रपति शिमॉन पेरेस ने बिन लादेन को बहुत बड़ा हत्यारा करार दिया है.

इस बीच ईरान से भी लादेन की मौत पर प्रतिक्रिया आई है. ईरान का कहना है कि लादेन की मौत के साथ ही अमरीका के पास अब मध्य पूर्व में अपनी सेनाओं को तैनात करने का कोई कारण नहीं रह जाता है.

ईरान के अनुसार अमरीका आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर मध्य पूर्व में सेनाएं तैनात करता रहा है और अब लादेन की मौत से ये कारण खत्म माना जाना चाहिए.

संबंधित समाचार