दुनिया को मिली राहत

हामिद करज़ई
Image caption अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि अब आतंकवादी गतिविधियां बंद हो जाएंगी

यूं तो ओसामा बिन लादेन सउदी अरब छोड़ने के बाद कई देशों में रहे लेकिन अफ़ग़ानिस्तान उनकी मुख्य कर्मभूमि बनी जिसकी अफ़ग़ानिस्तान और उसके नागरिकों को भारी क़ीमत अदा करनी पड़ी.

ओसामा की मृत्यु की ख़बर पाकर अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि उनकी सरकार बराबर ये कहती रही है कि आतंकवाद की जड़ें अफ़ग़ानिस्तान में नहीं हैं.

करज़ई ने कहा, "हमें उम्मीद है कि ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद आतंकवादी गतिविधियां बंद हो जाएंगी. दुनिया को ये समझना चाहिए कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई अफ़ग़ानिस्तान के गांवों में नहीं लड़ी जानी चाहिए".

"ये लड़ाई बेक़ुसूर अफ़ग़ान नागरिकों के ख़िलाफ़ नहीं लड़ी जा सकती, बच्चों और महिलाओं पर बम्बारी करके नहीं लड़ी जा सकती".

"ये लड़ाई उन जगहों पर उन ट्रेनिंग कैम्पों में लड़ी जानी चाहिए जहां ओसामा को संरक्षण मिला हुआ था जो अफ़ग़ानिस्तान में नहीं है और आज ये बात साबित हो गई".

अल क़ायदा पर कीनिया और तंज़ानिया स्थित अमरीकी दूतावासों पर एक साथ हमले करने का दोष लगाया जाता रहा है जिनमें कई सौ लोग मारे गए थे.

सन 2002 में कीनिया के एक होटल पर हुए हमले के लिए भी अल क़ायदा को ही ज़िम्मेदार बताया गया था.

ओसामा की मौत पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कीनिया के प्रधानमंत्री राएला ओडिंगा ने कहा, "हमारे देश पर हुए हमलों का हमारा पर्यटन उद्योग पर गहरा असर पड़ा था जिससे आर्थिक विकास धीमा पड़ गया".

"इन हमलों में जो लोग घायल हुए वो अब भी उसका कष्ट उठा रहे हैं. हम लोग ये सवाल करते रहे हैं कीनिया को क्यों निशाना बनाया गया और वो भी दो बार".

'चरमपंथ का अंत नहीं हुआ है'

फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी ने ओसामा को ढूंढ कर मारने के लिए अमरीकी दृढ़ता की प्रशंसा की और इसे आतंकवाद के ख़िलाफ़ चल रही दुनिया की मुहिम की विजय बताया.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने इस ख़बर का स्वागत किया लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि इसका मतलब ये नहीं है कि चरमपंथ का अंत हो गया है.

यही चेतावनी जर्मनी के विदेशमंत्री गुइडो वैस्टरविल ने दी.

उन्होने कहा, "ओसामा बिन लादेन दुनिया का सबसे नृशंस आतंकवादी था. इस व्यक्ति ने हज़ारों निरपराध लोगों की जानें लीं. ये दुनिया भर के शांतिप्रिय और उदारवादी लोगों के लिए बड़ी अच्छी ख़बर है कि उसके आतंकवादी खेल समाप्त हो गया है".

"हालांकि आतंकवाद और चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है और हमें चौकस रहना होगा और हो सकता है कि इसका प्रतिरोध हो".

ऑस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने कहा कि अभी अल क़ायदा का सफ़ाया नहीं हुआ है.

उन्होने कहा, "ओसामा बिन लादेन की मौत पर मैं ये कहना चाहूंगी कि अल क़ायदा को इससे धक्का ज़रूर लगा है लेकिन अल क़ायदा का नाश नहीं हुआ है".

"आतंकवाद के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई चलती रहेगी. हम अफ़ग़ानिस्तान में उपस्थिति बनाए रखेंगे जिससे वो देश फिर से आतंकवादियों का शरण स्थान न बने".

मध्यपूर्व के नेताओं ने भी इस घोषणा का स्वागत किया.

फ़लस्तीनी सरकार के प्रैस कार्यालय के ग़स्सान ख़ातिब ने कहा कि ये विश्व शांति के लिए अच्छी ख़बर है.

तुर्की के राष्ट्रपति अब्दुल्लाह गुल ने कहा कि चरमपंथियों को ओसामा की मौत से सबक़ लेना चाहिए.

उन्होने कहा, "ये दिखाता है कि आतंकवादी और आतंकवादी संगठनों के नेता आख़िरकार पकड़े ही जाते हैं ज़िंदा या मुर्दा".

"दुनिया के सबसे ख़तरनाक और परिष्कृत आतंकवादी संगठन के नेता का इसतरह पकड़ा जाना सबके लिए एक सबक़ होना चाहिए. मैं बहुत ख़ुश हूं".

कुल मिलाकर ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की ख़बर से दुनिया के नेता राहत महसूस कर रहे हैं.

संबंधित समाचार