'नस्लभेदी नहीं थे मेलबर्न के हमले'

  • 4 मई 2011
भारतीय छात्र
Image caption भारतीय छात्रों ने पिछले वर्ष ऑस्ट्रेलिया में नस्लभेदी हमलों का विरोध किया था

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न शहर की एक न्यायाधीश ने कहा है कि करीब डेढ़ साल पहले हुई वो घटना नस्लवाद से प्रेरित नहीं थी जिसमें सात युवकों ने छह भारतीयों की जमकर पिटाई की थी.

इन अभियुक्तों ने इस अभियान को "पुंजी हंटिंग" का नाम दिया था जिसके तहत वो गाड़ी चलाते हुए अलग-अलग ठिकानों पर भारतीयों की तलाश कर रहे थे.

दिसंबर 2009 में लगातार चार रातों में उन्होंने छह भारतीयों को बहुत बुरी तरह मारा और लूटा.

न्यायाधीश लिज़ गेनर ने अपना फ़ैसला सुनते हुए कहा कि हालाँकि इन युवकों ने विशेष रूप से भारतीयों को निशाना बनाया मगर उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनके अनुसार उन्हें लगता था कि भारतीयों को लूटना ज़्यादा आसान था.

उन्होंने इस मामले में अभियुक्तों को गाड़ी में घुमानेवाले एक 19 वर्षीय युवक रिकी पेट्रूसिक को तीन साल की निलंबित सज़ा सुनाई जिसके तहत उसे जेल जाने की जगह सामाजिक सेवा करनी होगी.

इस मामले में पिछले साल दिसंबर में भी एक 19 वर्षीय युवक पीटर सालापुरा को इसी तरह एक साल की निलंबित सज़ा सुनाई गई थी.

अदालत ने एक और युवक जूलियन मेडिना को तीन साल के लिए एक सुधार गृह - युवा न्याय केंद्र – में भेजने का फ़ैसला दिया था.

आश्चर्यचकित

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Image caption भारतीय छात्र नितिन गर्ग की हत्या के मामले में सज़ा सुनाई जानी है

द ऑस्ट्रेलिया इंडिया सोसायटी ऑफ़ विक्टोरिया के अध्यक्ष डॉक्टर गुरदीप अरोड़ा ने इस फ़ैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेलबर्न में भारतीय समुदाय ही नहीं बल्कि स्थानीय ऑस्ट्रेलियाई लोग भी इससे ख़ासे हैरान हैं.

उन्होंने इसे बिल्कुल अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि ये बात किसी को समझ नहीं आ रही कि कुछ लोग इस तरह से भारतीयों को सड़क पर चुनकर पीटते हैं मगर उन्हें एक दिन भी जेल में नहीं गुज़ारना पड़ेगा.

वैसे डॉ अरोड़ा ने ये ज़रूर कहा कि ऑस्ट्रेलिया में आम तौर पर लोगों को यथासंभव कम कड़ी सज़ा सुनाई जाती है लेकिन इसकी वजह से कभी-कभी बहुत हिंसक अपराध करने वाले अपराधियों को भी हल्की सज़ा मिलती है जिससे आम लोग परेशान हैं.

उन्होंने इस बात से असहमति जताई कि हमले नस्लवादी नहीं थे.

उन्होंने कहा कि भले ही उन युवाओं का मूल उद्देश्य लूट-पाट करना हो सकता है लेकिन जिस तरह से उन्होंने चुनकर भारतीयों को पीटा इससे लगता है कि इसमें कहीं-न-कही नस्लवादी तत्व था.

ग़ौरतलब है कि पीटर सालापुरा की माँ सर्बिया में पैदा हुई थी जबकि मेडिना की माँ फिलीपींस में.

कुछ ही हफ़्ते पहले 16 वर्ष के एक युवक ने मेलबर्न में भारतीय छात्र नितिन गर्ग की हत्या करने का जुर्म क़बूल किया था.

इस व्यक्ति की पहचान गुप्त रखी गई है और इस मामले में सज़ा सुनाई जानी है.

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