ओसामा को समुद्र में ही जगह क्यों मिली?

  • 3 मई 2011
ओसामा बिन लादेन इमेज कॉपीरइट nocredit

अमरीकी अधिकारी कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन के शव का पूरा सम्मान किया गया और उन्हें समुद्र में दफ़न कर दिया गया. लेकिन कुछ मुसलमान इसके औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं.

इस्लामी परंपरा के अनुसार मरने के बाद जिस्म को जल्द से जल्द दफ़न कर दिया जाना चाहिए, बशर्ते कि पोस्टमॉर्टम की ज़रूरत न हो.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इसी परंपरा का पालन करते हुए तेज़ी दिखाई गई और दफ़नाने की सभी ज़रूरी प्रक्रियाएँ पूरी की गईं.

उनका कहना है कि अमरीका के विमान वाहक पोत यूएसएस कार्ल विन्सन पर शव को एक सफ़ेद चादर में लपेट कर एक बड़े थैले में रखा गया और फिर अरब सागर में उतार दिया गया.

यह सब ब्रितानी समयानुसार सुबह छह बजे हुआ, यानी ओसामा के सिर पर गोली मारने के लगभग बारह घंटे बाद. एक गोली मारने के बाद दोबारा मारी गई ताकि उनकी मौत में कोई शक न रहे.

उसके बाद शव को अफ़ग़ानिस्तान ले जाया गया और ओसामा की पहचान सुनिश्चित की गई. अधिकारियों का कहना है कि उनके डीएनए का नमूना लिया गया जो उनके कई परिवारजनों से मेल खाता था.

फिर अफ़ग़ानिस्तान से शव यूएसएस कार्ल विन्सन नाम के जहाज़ पर ले जाया गया.

एक अमरीकी रक्षा अधिकारी का कहना है, "एक सैन्य अधिकारी ने धार्मिक अंश पढ़े जिनका एक स्थानीय निवासी ने अरबी में अनुवाद किया".

लेकिन समुद्र में क्यों?

ब्रिटेन की एक मस्जिद के इमाम और मुस्लिम काउंसिल फ़ॉर रिलीजियस ऐंड रेशियल हारमनी के अध्यक्ष डॉक्टर अब्दुल जलील साजिद का कहना है कि मौत के बाद चार ज़रूरी काम होते हैं 'ग़ुस्ल यानी नहलाना, कफ़न में लपेटा जाना, नमाज़े जनाज़ा और दफ़नाना'.

उनका कहना है कि इस मौक़े पर किसी इमाम की मौजूदगी ज़रूरी नहीं है लेकिन कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसे इस्लाम के तहत 'दफ़न के बुनियादी सिद्धांतों' की जानकारी हो. उनका यह भी सवाल है कि समुद्र में दफ़नाना क्यों ज़रूरी था. वह कहते हैं कि ऐसा तब हो सकता है जब समुद्री यात्रा के दौरान किसी की मौत हो जाए लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था.

डॉक्टर साजिद का तर्क है कि ओसामा बिन लादेन के परिवार या संगठन में कोई ऐसा व्यक्ति ज़रूर मिल जाता जो शव को सही तरीक़े से दफ़ना देता.

जोर्डन विश्विद्यालय में इस्लामी क़ानून के प्रोफ़ेसर मोहम्मद क़ुदाह ने एपी समाचार एजेंसी से कहा कि अगर कोई भी ओसामा के शव को लेने और उसे दफ़नाने के लिए तैयार नहीं था तो समुद्र में डाल देना जायज़ है.

लेकिन साथ ही वह यह भी कहते हैं, "यह कहना या दावा करना सही नहीं है कि इस्लामी देशों में से कोई भी बिन लादेन के शव को लेने को तैयार नहीं था".

एपी ने दुबई के ग्रैंड मुफ़्ती मोहम्मद अल-क़ुबैसी को भी यह कहते बताया है कि समुद्र में दफ़नाना असाधारण परिस्थिति में जायज़ है और यह उनमें से एक नहीं थी.

दफ़नाने की प्रक्रिया

वह कहते हैं, "यदि परिवार शव को लेने को तैयार नहीं है तो इस्लाम कहता है, आप कहीं भी एक क़ब्र खोदें, नमाज़ पढ़ें और दफ़ना दें".

अमरीकी अधिकारी समुद्र में दफ़नाने की दो वजहें बता रहे हैं. पहली, वह ओसामा की क़ब्र को मज़ार नहीं बनने देना चाहते थे. और दूसरी, अन्य देशों से इस बारे में बात करने का समय नहीं था. सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक, सऊदी अरब ने शव लेने से इनकार कर दिया था. अगर यह बात सही है तो इसका मतलब उन्हें यह प्रस्ताव दिया गया था और अगर सऊदी अरब ओसामा को अपने यहाँ कहीं दफ़ना देता तो क़ब्र को मज़ार बनते देर नहीं लगती.

हालाँकि एबीसी के जोनाथन कार्ल ने दफ़नाने की प्रक्रिया से पहले ही लिख दिया था, "अमरीकी अधिकारियों ने मुझे बताया कि वह ओसामा के दफ़नाने की जगह को एक आतंकवादी मज़ार नहीं बनने देना चाहते हैं और समुद्र में दफ़ना कर उसकी मौत का आख़िरी नामो-निशान भी क़ायम नहीं रखना चाहते हैं".

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