पाकिस्तान ने नाराज़गी जताई

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ओसामा बिन लादेन पर अमरीकी अभियान के बाद बढ़ती आलोचनाओं के बीच पाकिस्तान ने कहा है कि किसी को भी, ख़ासतौर से अमरीका को, इस तरह की अनाधिकृत और एकतरफ़ा कार्रवाई का हक़ नहीं है.

पाकिस्तान सरकार का ये विस्तृत बयान पूरी तरह से ये स्पष्ट करता है कि इस अभियान की पाकिस्तानी अधिकारियों को भनक भी नहीं थी.

लेकिन साथ ही पाकिस्तानी सेना की आशंका को भी दर्शाता है कि अमरीका इस तरह की कार्रवाई फिर से कर सकता है.

पाकिस्तान सरकार ने साफ़ तौर से कहा है बिन लादेन के ख़िलाफ़ इस कार्रवाई में न तो उनकी फ़ौज और न ही सामरिक अड्डों का इस्तेमाल किया गया.

इसमें अमरीकी अधिकारियों के उस बयान का भी ज़िक्र है कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को अमरीकी हेलिकॉप्टरों को रोकने के लिए तैयार किया जाने लगा था.

लेकिन बयान में इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि इन विमानों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया.

लादेन का परिवार

बयान में ये भी कहा गया है कि अभियान के बाद बिन लादेन के परिवार के वो सदस्य जो बच गए, अब पाकिस्तान की निगरानी में हैं.

Image caption सरकार का कहना है कि पाकिस्तानी फ़ौज या उसके अड्डों का बिन लादेन के ख़िलाफ़ कार्रवाई में कोई इस्तेमाल नहीं हुआ.

सरकार का कहना है कि ये लोग सुरक्षित हाथों में हैं और जो घायल हैं उन्हें समुचित चिकित्सा उपलब्ध करवाई जा रही है.

उनका कहना है कि इन लोगों को उनके मूल देशों के सुपुर्द कर दिया जाएगा.

बयान में ये भी दिखाने की कोशिश है कि जिस तरह बिन लादेन के मकान की चारों तरफ़ से कांटेदार तारों से सुरक्षा घेराबंदी की गई थी वो उस इलाक़े के लिए आम बात है.

लेकिन ये एक ऐसा दावा है जिसे सभी विश्लेषकों ने नकार दिया है.

आईएसआई का बचाव

बयान में ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का बचाव करने की भी कोशिश की गई है.

सरकार का कहना है कि ऐबटाबाद और उस के आसपास के इलाक़े वर्ष 2003 से आईएसआई की निगरानी में थे और उसी वजह से 2004 में अल क़ायदा के वरिष्ठ नेता को गिरफ़्तार किया गया था.

बयान में बताया गया है कि जहाँ तक ओसामा बिन लादेन के घर का संबंध हैं, तो आईएसआई के अधिकारी अमरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए और अपने मित्र देशों के ख़ुफ़िया तंत्र को वर्ष 2009 से सूचित करते आए हैं.

विदेश मंत्रालय के अनुसार पिछले महीने के दूसरे सप्ताह में भी इस प्रकार की जानकारी दी गई थी जिसकी बुनियाद पर सीआईए ने ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की और श्रेय आईएसआई को देने के बजाए ख़ुद ले लिया.

बयान में बताया गया है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि आईएसआई की ओर से दी गई जानकारी पर सीआईए और दूसरी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने सफलताएँ प्राप्त की हैं और अल क़ायदा और आतंकवाद के ख़िलाफ़ में जितनी कामयाबी आईएसआई को मिली है उतनी दुनिया की किसी ख़ुफ़िया एजेंसी को नहीं मिली है.

इसके पहले आईएसआई ने कहा कि ओसामा की पाकिस्तान में मौजूदगी के बारे में उन्हें जानकारी नहीं होने को लेकर वो बहुत शर्मिंदा हैं.

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