‘पाक 26/11 मामले में कार्रवाई करे’

टिमोथी रोमर
Image caption ओसामा की पाकिस्तान में मौजूदगी के बाद पाकिस्तान नए सवालों के घेरे में आ गया है.

भारत में अमरीका के राजदूत टिमोथी रोमर ने कहा है कि पाकिस्तान को मुंबई हमलों मामले में तेज़ी से कार्रवाई करनी चाहिए और अमरीका इस बाबत परिणाम देखना चाहता है.

उनका कहना था, “क्या पाकिस्तान लश्कर-ए-तैबा के ख़िलाफ़ पर्याप्त कदम उठा रहा है? क्या वो मुंबई हमलों के मामले में कोई कार्रवाई कर रहा है? क्या वो हाफ़िज़ सईद और ज़की-उर-रहमान लखवी के ख़िलाफ़ पर्याप्त कार्रवाई कर रहा है? मुझे नहीं लगता. उन्हें इस बाबत और कदम उठाने होंगें.”

साथ ही उन्होंने कहा कि अमरीकी संसद इस बात पर कड़ाई से विचार करेगी कि चरमपंथ का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन ऐबटाबाद में किसकी शह में रह रहा था.

उनका कहना था कि अमरीका इस बारे में पाकिस्तान से कुछ तल्ख़ सवाल करेगा.

उन्होंने कहा, “सुरक्षा के क्षेत्र में पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय सहायता पर अब अमरीका फिर से विचार करेगा.”

उनका कहना था कि ओसामा की ऐबटाबाद में मौजूदगी को देखते हुए अमरीकी सांसद पाकिस्तान को दिए जाने वाले हथियारों की भी समीक्षा करेगें.

उन्होंने कहा, “हम इस बात की समीक्षा करेंगें कि पाकिस्तान को मुहैया करवाए गए हथियारों का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं. पिछले 18 महीनों में हमने देखा है कि अल क़ायदा के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान ने तेज़ी लाई है जो एक सकारात्मक पहलू है.”

सहायता की समीक्षा

उन्होंने कहा कि ओसामा बिन लादेन के इस्लामाबाद के बाहर पाए जाने के बाद अमरीका कुछ दूसरे सवाल भी उठाएगा.

ग़ौरतलब है कि ओसामा की पाकिस्तान में मौजूदगी के बाद पाकिस्तान नए सवालों के घेरे में आ गया है.

गत मंगलवार को पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई ने कहा था कि वे ओसामा के पाकिस्तान में पाए जाने पर बहुत शर्मिंदा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार भारत में अमरीकी राजदूत टिमोथी रोमर ने कहा, “हमें याद है कि वर्ष 2003 में ख़ालिद शेख़ मोहम्मद भी रावलपिंडी में पाए गए थे. ये एक चिंताजनक बात है. हम इस मामले की तह तक जाना चाहते हैं. हमें ये सुनिश्चित करना है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली वित्तीय सहायता का इस्तेमाल सिर्फ़ अल क़ायदा के ख़िलाफ़ ही नहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैबा जैसे चरंपंथी गुटों के ख़िलाफ़ भी हो.”

उन्होंने कहा कि ओसामा का मारा जाना ये दर्शाता है कि अमरीका इंसाफ़ की लड़ाई में प्रतिबद्ध है.

हालांकि उन्होंने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस बात को स्वीकार किया है कि ये अभियान पाकिस्तान के सहयोग के बिना संभव नहीं था.

लेकिन उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को और ज़्यादा कार्रवाई करने की ज़रूरत है.

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