'लोकतांत्रिक आंदोलनों की मदद करें'

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Image caption उन्होंने जी-8 के देशों से मध्यपूर्व में हो रहे बदलाव की मदद करने की अपील की.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मघ्यपूर्व में चल रहे लोकतांत्रिक आंदोलनों की हर संभव मदद करनी चाहिए.

लंदन में विदेश नीति पर अपने एक भाषण के दौरान उत्तरी अफ़्रीक़ा और मध्यपूर्व के हालात के बारे में हेग ने कहा कि लोकतंत्र के समर्थन में वहां जो हवा बह रही है उसको क़ायम रखने और उसके दूरगामी असर के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को और अधिक मदद करने की ज़रूरत है.

उन्होंने यूरोपीय संध से आह्वान किया कि राजनीतिक सुधार कर रहे देशों की तरफ़ उन्हें दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए और उन देशों की आर्थिक मदद करनी चाहिए.

विलियम हेग के अनुसार उन देशों से अधिक संबंध बढ़ाकर वहां निरंकुश शासन, हिंसक संघर्ष और आतंकवाद को दोबारा पैर जमाने से रोका जा सकता है.

'सुझाव'

उन्होंने लीबिया और सीरिया को चेतावनी देते हुए कहा कि बदलाव का विरोध करने में असफलता निश्चित है.

उन्होंने इन देशों के अधिकारियों को सुझाव देते हुए कहा कि जो सरकार अपने ही लोगों की जायज़ शिकायतों को दबाने की कोशिश करती है वो सराकर आख़िरकार टिक नहीं सकती.

उनका कहना था,''जो सरकार सुधार से अपना मुंह मोड़ लेती है जैसा कि लीबिया ने किया है और सीरिया इसकी शुरूआत कर रही है उसकी हार तय है.''

हेग ने कहा कि जायज़ शिकायतों को दूर करने से इनकार करने से कोई फ़ायदा नहीं. आज़ादी की चाह को सलाखों के पीछे नहीं क़ैद किया जा सकता है, ताला चाहे कितना भी मज़बूत क्यों ना हो.

'सही अभिव्यक्ति'

ओसामा बिन लादेन की मौत के बारे में उन्होंने कहा कि लादेन की मौत निश्चित तौर अल-क़ायदा के लिए बहुत बड़ा झटका है लेकिन अभी भी ये पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है.

उन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई को जारी रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की.

इस मौक़े पर उन्होंने तालिबान से भी अपील की कि वह अल-क़ायदा से अलग होकर राजनीतिक बातचीत में शामिल हों.

दुनिया भर के मुसलमानों की एक तरह से वकालत करते हुए उन्होंने कहा, ''कुछ लोगों ने ग़लती से ये सोच लिया था कि 9/11 की घटना मुसलमानों की शिकायतों की अभिव्यक्ति थी, लेकिन ऐसा नहीं है. दर असल दुनिया भर के मुसलमान क्या चाहते हैं इसकी सही अभिव्यक्ति हमें 2011 में तहरीर चौक में देखने को मिलती हैं, 2001 में अमरीका के ग्राउंड ज़ीरो में नहीं.''

उन्होंने कहा कि लंबे समय में दुनिया भर के मुसलमान ही इस्लामी चरमपंथ की विचारधारा को सबसे बड़ी चोट पहुचाएंगे.

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