विश्व युद्ध के आख़िरी सैनिक की विदाई

  • 5 मई 2011
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Image caption चौल्स बाद में युद्ध के ख़िलाफ़ हो गए थे.

पहले विश्व युद्ध में लड़ चुके सबसे लंबी उम्र के जीवित सैनिक क्लाउड चोल्स की 110 की आयु में मौत हो गई है.

ब्रिटेन में जन्मे चोल्स 15 साल की उम्र में सेना में भर्ती हुए थे.

उनके दोस्त उन्हें 'चकल्स' बुलाते थे.

चोल्स 1920 में आस्ट्रेलिया चले गए थे जहाँ उन्होंने 1956 तक सेना में काम किया.

चोल्स की मौत आस्ट्रेलिया के पर्थ शहर के एक नर्सिंग होम में हुई.

उनकी पत्नी इथेल की मृत्यु तीन साल पहले हो गई थी. उनके तीन बच्चे और 11 पोते पोतियाँ हैं.

चोल्स की 84-वर्षीय बेटी, डैफ़ने एडिंगर, ने समाचार ऐजेंसी एपी से कहा है, "हम सब उन्हें प्यार करते थे. वो अब जीवित नहीं हैं ये सोचकर बहुत दुख होगा लेकिन दुनिया ऐसे ही चलती है."

युद्ध विरोधी

ब्रिटेन के वॉरसेस्टशायर में 1901 में पैदा हुए चोल्स ने युद्ध की शुरूआत में ही सेना में भर्ती होने की कोशिश की थी लेकिन तब उनकी उम्र बहुत कम थी.

बाद में उन्होंने ब्रितानी नौसेना में जगह मिली और उन्होंने बड़ी लड़ाइयों में हिस्सा लिया.

जर्मन नौसेना के एक बेड़े ने जब नवंबर 1918 में 'फर्थ ऑफ फ़ोर्थ' में सरेंडर किया तो वो उस समय वहाँ मौजूद थे.

बाद में उनकी नियुक्ति आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हो गई जहाँ कुछ दिन ब्रितानी सेना के लिए काम करते रहने के बाद वो आस्ट्रेलिया की सेना में भर्ती हो गए.

द्वितीय विश्व युद्ध में उन्हें दुश्मन के अहम ठिकानों के विध्वंस की ज़िम्मेदारी दी गई थी.

दुनिया के दो सबसे बड़े युद्ध में शामिल होने के बावजूद बाद में चोल्स युद्ध के विरोधी हो गए थे.

पहले विश्व युद्ध में लड़ चुके तीन सबसे ज़्यादा उम्र के सैनिक ब्रिटेन में रह रहे थे और उनकी मौत 2009 में हो गई थी.

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