ब्रिटेन में दिखी वोटरों की नाराज़गी

Image caption निक क्लेग का कहना है कि सरकारी ख़र्च में कटौती की क़ीमत उनकी पार्टी ने चुकाई है

ब्रिटेन में कंज़रवेटिव-लिबरल डेमोक्रेटिक गठबंधन के सत्ता में आने के बाद पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर हुए स्थानीय निकायों के चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को भारी राजनीतिक नुक़सान का सामना करना पड़ा है.

लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और उप-प्रधानमंत्री निक क्लेग ने कहा है कि उनकी पार्टी को जनता सरकारी ख़र्च में कटौती के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रही है जिसका नुक़सान उन्हें उठाना पड़ा है.

विपक्षी लेबर पार्टी को सबसे अधिक फ़ायदा हुआ है, कई शहरों का प्रशासन लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथ से निकलकर लेबर पार्टी के हाथों में आ गया है.

इन चुनाव परिणामों को गठबंधन सरकार के कामकाज पर जनता की पहली प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है.

चुनाव विश्लेषक प्रोफ़ेसर जॉन कर्टिस का कहना है कि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के गठन के बाद से स्थानीय चुनाव में यह उसका सबसे बुरा प्रदर्शन है.

दिलचस्प बात ये भी है कि सत्ताधारी गठबंधन के बड़े पार्टनर कंज़रवेटिव पार्टी को कोई नुक़सान नहीं हुआ है और उसकी स्थिति कमोबेश वही है जो पिछले चुनाव के बाद थी लेकिन लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के वोटों में दस प्रतिशत की कमी आई है और यह सारा फ़ायदा विपक्षी लेबर पार्टी को मिला है.

सफ़ाया

उत्तरी इंग्लैंड के कई शहरों में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी का लगभग सफ़ाया हो गया है, स्थानीय चुनावों में काउंसिलर के पद के लिए पिछली बार जीते पार्टी के 300 से अधिक उम्मीदवार इस बार हार गए हैं.

विपक्षी लेबर पार्टी को इंग्लैंड और वेल्स में काफ़ी सफलता मिली है जबकि स्कॉटलैंड में स्थानीय स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) को बढ़त मिलती दिख रही है.

Image caption प्रधानमंत्री कैमरन की पार्टी को कोई ख़ास नुक़सान नहीं हुआ है

उत्तरी आयरलैंड की संसद में शिनफ़ेन और डीयूपी को बहुमत मिलने के आसार नज़र आ रहे हैं.

लेबर पार्टी वेल्स एसेंबली में बहुमत हासिल करने की ओर बढ़ रही है जबकि स्थानीय प्लाइड कमरी की नेता हेलन मेरी जोंस अपनी सीट भी नहीं बचा सकी हैं.

स्थानीय चुनावों में इंग्लैंड में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी थी और कई नगर निकायों पर उसका नियंत्रण था लेकिन इस बार के चुनाव में शेफ़ील्ड, हल, ब्रिस्टल और स्टॉकपोर्ट जैसे शहर उसके हाथ से निकल गए हैं जबकि लिवरपूल और मैनचेस्टर जैसे बड़े शहरों में भी उसके अनेक उम्मीदवार हार गए हैं.

शेफ़ील्ड में लेबर पार्टी ने स्थानीय प्रशासन पर नियंत्रण हासिल कर लिया है जबकि शेफ़ील्ड उप-प्रधानमंत्री निक क्लेग का निर्वाचन क्षेत्र है.

निक क्लेग ने कहा कि यह कठिन समय है और पार्टी को धूल झाड़कर दोबारा उठ खड़े होना होगा और आगे बढ़ना होगा.

स्कॉटलैंड में भी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को भारी झटका लगा है, उसके कई उम्मीदवारों की ज़मानत ज़ब्त हो गई है.

इसके अलावा गुरुवार को स्थानीय निकायों के चुनाव के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर एक रेफ़रेंडम का भी आयोजन किया गया था, यह रेफ़रेंडम या जनमत संग्रह इस बात पर हुआ था कि क्या ब्रितानी चुनाव प्रणाली में बदलाव किया जाना चाहिए.

लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की पहल पर आयोजित इस रेफ़रेंडम को वैकल्पिक मतदान प्रणाली या एवी वोटिंग सिस्टम कहा जा रहा है, जिसके तहत प्रस्ताव रखा गया था कि मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के हिसाब से क्रमिक प्राथमिकता दें, यानी पहली, दूसरी और तीसरी पसंद बताएँ.

इस जनमत संग्रह के परिणाम शुक्रवार की शाम तक आएँगे लेकिन जानकारों का कहना है कि नई प्रणाली को जनता का समर्थन मिलने के आसार न के बराबर हैं.