ऑपरेशन ओसामा का हेलिकॉप्टर

ब्लैकहॉक
Image caption अमरीका ने ऑपरेशन ओसामा के लिए यूएच-60 ब्लैकहॉक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया था.

अल-क़ायदा प्रमुख को मारने ऐबटाबाद पहुंची अमरीकी सेना के विशेष दस्ते ने एक ख़ास क़िस्म के हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया था.

जानकारों के मुताबिक़ विशेष दस्ते ने जिस हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया था उसको पहले किसी ने नहीं देखा था.

इसके बारे में जानकारी तब मिली जब विशेषज्ञों ने ऐबटाबाद ऑपरेशन के दौरान तबाह हुए हेलिकॉप्टर के मलबे का निरिक्षण किया.

ऐबटाबाद ऑपरेशन के दौरान अमरीकी दस्ते नेवी सिल्स का एक हेलिकॉप्टर ख़राब होकर गिर गया था और ऑपरेशन की समाप्ति के बाद नेवी सिल्स ने उस हेलिकॉप्टर को तबाह कर दिया था.

लेकिन बावजूद इसके हेलिकॉपेटर का पिछला हिस्सा नष्ट नहीं हो सका था और उड्डयन विशेषज्ञों ने इसको देखकर हमले में इस्तेमाल किए गए हेलिकॉप्टर के

बारे में जानकारी दी.

'यूएच-60 ब्लैकहॉक'

जांच पड़ताल के बारे विशेषज्ञ इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि वो यूएच-60 ब्लैकहॉक हेलिकॉप्टर था जिसमें कई बदलाव किए गए थे ताकि इसकी आवाज़ कम से कम हो जाए और रेडार भी इसे नहीं पकड़ सकें.

विशेषज्ञों का मानना है कि पहली बार किसी सैनिक अभियान में स्टील्थ हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इससे पहले भी स्टील्थ हेलिकॉप्टर बनाए जा चुके हैं.

इससे पहले सिकौर्स्की एयरक्राफ़्ट ने अमरीकी सेना के लिए आरएएच-66 नाम के स्टील्थ हेलिकॉप्टर बनाए थे लेकिन उसकी बढ़ती क़ीमतों के कारण 2004 में उसको बनाना बंद कर दिया गया था.

इस बारे में ऐवियेशन वीक नामक मैगज़ीन के संपादक बिल स्वीटमैन कहते हैं, ''इसमे नई बात ये है कि इन हेलिकॉप्टरों को ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल किया गया है. इससे पहले हमने इसका इस तरह से इस्तेमाल नहीं देखा है.''

बिल के मुताबिक़ ख़ास बात ये है कि इससे आप निशाने को चौंकाने में कामयाब होते हैं और निशाने को जितना कम समय मिले उतना अच्छा है.

हेलिकॉप्टर की आवाजाही को गुप्त रखने के लिए उसके आकार और साइज़ में परिवर्तन करना पड़ता है ताकि वो रेडार के ज़रिए ना पकड़ा जाए.

ब्रिटेन स्थित हेलिकॉप्टर मैगज़ीन रोटेरी के उपसंपादक टोनी ऑस्बॉर्न ने हेलिकॉप्टर के बारे में कहा, ''हेलिकॉप्टर का रोटर गियरबॉक्स ढका हुआ था. किसी

हेलिकॉप्टर में इस तरह का बदलाव मैंने इससे पहले कभी नहीं देखा है.उसके पिछले हिस्से को भी चिकना कर दिया गया है.जिससे रेडार नहीं पकड़ सकेंगे.''

ऑस्बॉर्न के अनुसार हेलिकॉप्टर की आवाज़ को कम करने के लिए उसके पिछले हिस्से के ब्लेड में भी बदलाव किए गए हैं.

पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी के शोयब हसन को बताया कि रेडार हेलिकॉप्टर को नहीं पकड़ सके और सिर्फ़ अफ़ग़ानिस्तान से पाकिस्तान अंदर आते वक़्त ही उन हेलिकॉप्टरों को देखा जा सका था.

उनके अनुसार कुल चार हेलिकॉप्टर थे जो बहुत नीचे आकर उड़ रहे थे.

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