इतिहास के पन्नों से

  • 30 मई 2011

इतिहास के पन्नों को पलटें तो तीस मई को बांग्लादेश के राष्ट्रपति की हत्या हुई थी, आयरिश रिपब्लिकन आर्मी ने संघर्षविराम की घोषणा की थी और फ़्रांस ने ब्रिटेन से गोमांस के आयात पर प्रतिबंध लगाया था.

1981 : बांग्लादेश के राष्ट्रपति की हत्या

Image caption लोकप्रिय और सम्मानित नेता थे ज़िया-उर-रहमान

तीस मई 1981 को बांग्लादेश के राष्ट्रपति ज़िया-उर-रहमान की दक्षिण-पूर्वी शहर चिटगांव में हत्या कर दी गई थी.

सरकार के ख़िलाफ़ विद्रोह करनेवाले कुछ सैनिकों ने उस सरकारी गेस्ट हाउस पर हमला कर दिया था जिसमें राष्ट्रपति ज़िया-उर-रहमान ठहरे हुए थे.

राष्ट्रपति ज़िया 45 वर्ष के थे. चटगांव गेस्ट हाउस में शोर शराबा सुनकर जब उन्होंने अपने कमरे का दरवाज़ा खोला तो उन्हें गोली मार दी गई.

इस गोलीबारी में आठ लोग मारे गए थे जिनमें राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात एक सुरक्षाकर्मी और एक हमलावर भी शामिल था.

ऐसा माना जाता है कि ये हत्याएं सैनिक विद्रोह का हिस्सा थीं.

विद्रोहियों के नेता मेजर जनरल मंज़ूर ने तख़्तापलट की कोशिश इसलिए की थी क्योंकि वो ढाका के एक कम महत्वपूर्ण जगह पर किए गए अपने तबादले से नाराज़ थे.

राष्ट्रपति ज़िया-उर-रहमान की हत्या के बाद विद्रोहियों ने एक क्रांतिकारी समिति बनाने की घोषणा की थी लेकिन वो अपने मक़सद में क़ामयाब नहीं हुए क्योंकि उन्हें जन समर्थन हासिल नहीं हुआ.

राष्ट्रपति ज़िया बेहद लोकप्रिय नेता थे और उनकी मृत्यु के बाद बांग्लादेश की राजधानी ढाका में दसियों हज़ार लोग अपनी संवेदना व्यक्त करने के लिए जमा हुए थे.

उनके बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने वाले अब्दुस सत्तार ने देश में आपातकाल और 40 दिन तक राजकीय शोक की घोषणा कर दी थी.

1972: आईआरए ने की संघर्षविराम की घोषणा

Image caption अधिकतर लोग सैन्य कार्रवाई रोकने के पक्ष में थे

तीस मई 1972 को उत्तरी आयरलैंड में आयरिश रिपब्लिकन आर्मी की आधिकारिक ईकाई ने संघर्षविराम की घोषणा कर दी थी. लेकिन उसने ब्रितानी सेना और सांप्रदायिक समूहों के हमले की स्थिति में आत्मरक्षा का अधिकार सुरक्षित रखा था.

हालांकि जो अस्थाई आईआरए थी, उसने इस संघर्षविराम को मानने से ये कहते हुए इनकार कर दिया था कि इससे मौजूदा हालात में कोई ख़ास परिवर्तन नहीं होगा.

उत्तरी आयरलैंड के सचिव विलियम ह्वाइटलॉ ने आईआरए के इस क़दम का स्वागत किया था और एक प्रवक्ता ने इसे सही दिशा में उठाया गया क़दम बताया था.

आईआरए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था, ''उत्तरी आयरलैंड की बहुसंख्यक आबादी यही चाहती है कि सभी पक्ष सैनिक कार्रवाई बंद करें.''

हालांकि संगठन ने ये भी कहा था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं तब तक सविनय अवज्ञा और राजनीतिक आंदोलन का दौर जारी रहेगा.

1990: फ्रांस ने ब्रिटेन से गोमांस के आयात पर प्रतिबंध लगाया

Image caption 'मैड काउ' बीमारी की वजह से लगा प्रतिबंध

तीस मई 1990 को फ्रांस की सरकार ने बीएसई यानि ''मैड काउ'' बीमारी फैलने के डर से ब्रिटेन से गोमांस और जीवित मवेशियों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था.

फ्रांस ब्रिटेन के गोमांस का सबसे बड़ा उपभोक्ता था जो कि हर साल इसके आयात पर 18.3 करोड़ पाउंड ख़र्च करता था.

इस ख़बर से पशुपालन करने वाले किसानों को बड़ा धक्का लगा था जो पहले ही गोमांस की बिक्री में हुई भारी कमी से वित्तीय नुकसान का सामना कर रहे थे.

ये सरकार के लिए भी बुरी ख़बर थी, जो ब्रिटेन के लोगों को ये समझाने की कोशिश कर रही थी कि गोमांस खाना सुरक्षित है.

ब्रिटेन के कृषि मंत्री जॉन गम्मर ने फ्रांस सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को ग़ैर ज़रूरी, अन्यायपूर्ण और यूरोपीय सामुदायिक क़ानून के ख़िलाफ़ बताया था.

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