संयुक्त राष्ट्र की भूमिका की आलोचना

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Image caption पाकिस्तान में बाढ़

ब्रितानी संसद की अंतरराष्ट्रीय विकास समिति ने पिछले साल पाकिस्तान में आई बाढ़ का सामना करने में ख़राब नेतृत्व के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की आलोचना की है.

इस बाढ़ से क़रीब दो करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. संयुक्त राष्ट्र संघ की अपील पर एक अरब डॉलर से भी अधिक धन जमा किया गया था लेकिन इसका दो तिहाई ही ख़र्च हो पाया था.

विकास समिति का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संघ में एक मज़बूत नेतृत्व का अभाव है और इसमें भारी फेरबदल किया जाना चाहिए.

उसने आपदा के समय संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से काम को विभाजित किए जाने के तरीक़े की भी यह कहते हुए आलोचना की है कि उसने इसमें ज़रूरत से ज़्यादा एजेंसियों और धर्मार्थ संगठनों को जोड़ने की कोशिश की है.

समय की बर्बादी

कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि कभी-कभी तो बैठक में 600 संगठन शामिल होते थे, जिससे सूचनाएं तो बाँटी जाती थी लेकिन सीधे काम में कोई सहयोग नहीं मिलता था.

समिति के अध्यक्ष सांसद मॉल्कम ब्रूस का कहना था, "आप लोगों के साथ बैठकों में यह तय करने के लिए कि क्या किया जाए, कुछ ज़्यादा ही समय बर्बाद कर रहे हैं. जबकि आपको ज़रूरत है कि आप सेना के अंदाज़ में निर्देश दें और काम पूरा करें."

अंतरराष्ट्रीय विकास समिति का यह भी कहना था कि वह आपदाओं के लिए दान देने को हतोत्साहित नहीं करना चाहते, क्योंकि भविष्य में मौसम परिवर्तन और जनसंख्या वृद्धि से लोगों की ज़रूरतें बढ़ेंगी ही.

उसने पाकिस्तान की बाढ़ के बाद लोगों की उदारता की तारीफ़ की, लेकिन यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ को इसका सामना करने के लिए बेहतर सामंजस्य की ज़रूरत है.

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