बांग्लादेश में सड़क सुरक्षा पर सम्मेलन

  • 11 मई 2011
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Image caption भारत में भी सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या ज़्यादा है

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा दशक के पहले सम्मेलन में भाग लेने के लिए कई देशों के प्रतिनिधि वहाँ पहुँचे हुए हैं.

इस सम्मेलन में सड़क दुर्घटनाओं में लाखों लोगों की मौत रोकने के तरीक़ों पर विचार किया जाएगा.

एक अनुमान के अनुसार 2020 तक प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या क़रीब 19 लाख तक पहुँच जाएगी.

पूरी दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में मलेरिया से भी ज़्यादा लोग मरते हैं और ऐसा कहा जा रहा है कि इस दशक के अंत तक इससे मरने वालों की संख्या एचआईवी एड्स से मरने वालों से भी अधिक पहुँच जाएगी.

भारत में भी सड़क दुर्घटनाओं में हर घंटे 13 लोग मरते हैं. यह संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा है. भारत में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटनाओं से मरने वालों की संख्या बीस वर्षों की कश्मीर की अशांति और कारगिल युद्ध में मारे गए लोगों की संख्या से भी कहीं ज़्यादा है.

अभियान

इस लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दशक में इस संख्या को स्थिर रखने और फिर घटाने के लिए एक अभियान की शुरुआत की है.

बांग्लादेश में भी यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है और वहाँ भी भारत की तरह सड़क दुर्घटनाओं में काफ़ी लोग मरते हैं. सरकारी आँकड़ों के अनुसार वहाँ प्रति वर्ष विभिन्न दुर्घटनाओं में क़रीब दस हज़ार लोग मरते हैं.

राजधानी ढाका से पूर्वोत्तर नगर सिलहट तक के राजमार्ग को वाहन चालकों के लिए सबसे ख़तरनाक माना जाता है. इस सड़क पर दुर्घटना से मरने वालों की दर 0.6 मौत प्रति किलोमीटर है जो ब्रिटेन की सबसे जोखिम वाली सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं के औसत से दस गुना ज़्यादा है.

संयुक्त राष्ट्र संघ की मदद से चलने वाली इस योजना का उद्देश्य लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करना है.

इसका एक और उद्देश्य दुर्घटना संभावित राजमार्गों की हालत सुधारने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठनों से धन आकर्षित भी करना है.

इसकी प्राथमिकताओं में सड़क का इस्तेमाल करने वालों के व्यवहार को बेहतर बनाना और सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों की बेहतर देखभाल और पुनर्वास करना भी है.

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