सीरिया: हामा शहर में कड़ी कार्रवाई

Image caption सीरिया के होम्स शहर में सेना के टैंक सड़कों पर देखे जा सकते हैं.

सीरिया के सुरक्षा बल सेना के टैंकों की मदद से देश के तीसरे बड़े शहर, होम्स में सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला कर रहे हैं.

पहले पश्चिमी तट पर स्थित बानियास शहर, दक्षिण में स्थित डेरा, राजधानी दमिश्क के बाहरी इलाके और अब केंद्रीय सीरिया का होम्स शहर सुरक्षा बलों के निशाने पर है.

इन हमलों में हज़ारों लोग गिरफ्तार किए गए हैं और सैंकड़ों मारे गए हैं.

हालांकि सरकार का दावा है कि उसका निशाना ‘सशस्त्र आतंकवादी गुट’ ही हैं.

उसके मुताबिक इन गुटों से हथियार और असलहा बरामद हुआ है, साथ ही सुरक्षा बलों पर हमलों के लिए ‘आतंकवादियों’ द्वारा इस्तेमाल की जा रही 150 मोटरसाइकिलें भी मिली हैं.

संयुक्त राष्ट्र की अपील

उधर संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कुछ कूटनीतिज्ञों के मुताबिक, सीरिया ने अन्य देशों के दबाव के कारण संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद में सदस्यता पाने की कोशिशें छोड़ दी हैं. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सीरिया से प्रदर्शनकारियों के साथ रियायत बरतने को कहा है.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मैं राष्ट्रपति बशर-अल-असद से आज़ादी और सुधारों की मांग पर ध्यान देने और शांतिप्रिय प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ बल प्रयोग ना करने की अपील करता हूं.”

होम्स शहर से एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी को बताया, “पूरे शहर में सेना के टैंक मौजूद हैं, शहर से बाहर जाने पर रोक लगी है और अंदर आने वाले लोगों की जांच की जा रही है.”

खबरों के मुताबिक होम्स शहर में चोरी और लूटपाट हुई है, और बमबारी की वजह से मुख्य बाज़ार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है.

हालांकि पड़ोसी देश लेबनॉन की राजधानी बेरूत में मोजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर के अनुसार हमलों के बावजूद सीरिया के कई अन्य हिस्सों से समर्थन जताने के लिए सरकार-विरोधी प्रदर्शनों की खबरें हैं.

सैंकड़ों लोगों की मौत

सीरिया के एक मानवाधिकार संगठन, सीरियन ऑबज़रवेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक मार्च से शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उन पर सुरक्षा बलों के हमलों से अब तक 621 लोगों और 120 सैनिकों की जान जा चुकी है.

एक अन्य संगठन, सावासिया के मुताबिक 800 आम नागरिक मारे गए हैं.

हालांकि सरकार इन आंकड़ों को ग़लत बताती है. आधिकारिक तौर पर अब तक 100 सैनिकों की ही मौत हुई है.

सीरिया में विदेशी पत्रकारों को दाखिल होने की इजाज़त नहीं है, इसलिए वहां से आ रही जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्कि है.

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