'ओसामा की मौत हत्या नहीं थी'

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Image caption ओसामा बिन लादेन के परिवार ने उनके मारे जाने पर सवाल खड़े किए हैं.

अमरीका के अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने कहा है कि ओसामा बिन लादेन के परिसर पर हुए हमले में उनके मारे जाने को ‘हत्या नहीं कहा जा सकता.’

बीबीसी से बातचीत में होल्डर ने अमरीका के अभियान का बचाव करते हुए कहा है कि ये महज़ एक ‘पकड़ो या मारो’ मिशन था और अगर ओसामा ने आत्मसमर्पण किया होता तो वे उसे ज़िंदा पकड़ने के लिए तैयार थे.

उनका कहना था कि इस मिशन को अंजाम देने वाले नेवी सील्स के सैनिकों की सुरक्षा उनकी अहम प्राथमिकता थी.

गत दो मई को पाकिस्तान के ऐबटाबाद शहर में एक अमरीकी मिशन के तहत ओसामा बिन लादेन को गोली मार दी गई थी.

एरिक होल्डर का ये बयान ऐसे समय में आया है, जब ओसामा बिन लादेन के परिवार ने उनके मारे जाने पर सवाल खड़े किए हैं.

ओसामा बिन लादेन के बेटों ने अमरीका की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि उसने मनमाने तरीक़े से उनके पिता की हत्या को अंजाम दिया.

उन्होंने अमरीका से जवाब मांगा है कि उनके पिता को ज़िंदा क्यों नहीं पकड़ा गया.

'सही कार्रवाई'

अमरीका के अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने कहा कि विशेष सुरक्षाबल ने इस पूरे मिशन के दौरान समझदारी से काम लिया और सही क़दम उठाया.

उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में जबकि सुरक्षाबलों को इस बात का कोई साफ़ संकेत नहीं था कि ओसामा आत्मसमर्पण करेंगें या नहीं, उनकी कार्रवाई सही थी.

होल्डर ने कहा, “अगर ओसामा के आत्मसमर्पण की संभावना होता, तो हम उन्हें पकड़ सकते थे, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे अहम थी.”

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ओसामा के ख़िलाफ़ किया गया अभियान वैध था और दुश्मन कमांडरों पर हमला करने से जुड़े अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अधीन था.

उन्होंने कहा, “मुझे सच में ऐसा लगता है कि दुश्मन से लड़ने के मामले में अमरीका, ब्रिटेन और हमारे दूसरे सहयोगी देशों में थोड़ा अंतर है. हम क़ानून का आदर करते हैं. मेरे हिसाब से नेवी सील्स ने जिस तरह से इस अभियान को अंजाम दिया, वो अमरीका और ब्रितानी सिद्धांतों के अनुरूप था.”

ग़ौरतलब है कि ओसामा के मारे जाने पर संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई थी. संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि क्रिस्टॉफ़ हेंस और मार्टिन शेनिन ने कहा था कि केवल असाधारण स्थितियों में ही ऐसी हिंसा का प्रयोग होना चाहिए.

उनका कहना था कि एक चरमपंथी को भी एक अभियुक्त के रूप में देखा जाना चाहिए जिसके ख़िलाफ़ क़ानूनी रूप से कार्रवाई होनी चाहिए.

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