लीबियाई विद्रोहियों का दफ़्तर लंदन में

  • 12 मई 2011
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Image caption मुस्तफ़ा जलील ने लंदन में डेविड कैमरन से मुलाक़ात की है

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने लीबिया के विद्रोहियों से कहा है कि वे लंदन में अपना आधिकारिक कार्यालय खोलें.

ब्रिटेन ने विद्रोहियों के नेतृत्व वाले प्रशासन को लाखों पाउंड के पुलिस उपकरण देने की घोषणा की है ताकि वे बेनग़ाज़ी में क़ानून-व्यवस्था बनाए रख सकें.

इससे पहले यूरोपीय संघ घोषणा कर चुका है कि वह विद्रोहियों के नियंत्रण वाले शहर बेनगाज़ी में अपना दफ़्तर खोलने जा रहा है.

ब्रितानी प्रधानमंत्री ने लीबिया में विद्रोहियों के अंतरिम प्रशासन के चेयरमैन मुस्तफ़ा अब्दुल जलील से लंदन में मुलाक़ात की, इसी मुलाक़ात में उन्होंने मुस्तफ़ा जलील को लंदन में दफ़्तर खोलने का निमंत्रण दिया.

प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि लीबिया में मुस्तफ़ा जलील के नेतृत्व वाला अंतरिम प्रशासन ही ब्रिटेन का साझीदार है, उन्होंने स्पष्ट किया कि लीबिया में आने वाले बदलाव में कर्नल गद्दाफ़ी की कोई भूमिका नहीं हो सकती.

कैमरन ने कहा कि विद्रोहियों के नियंत्रण वाले देश के दूसरे सबसे बड़े शहर बेनगाज़ी में क़ानून व्यवस्था क़ायम रखने में सहायता करने के उद्देश्य से ब्रिटेन लाखों पाउंड क़ीमत के पुलिस उपकरण मुहैया करा रहा है जिनमें वायरलेस और सेटेलाइट फ़ोन शामिल हैं.

इसके अलावा ब्रिटेन अंतरिम प्रशासन को संचार तंत्र व्यवस्थित करने में भी सहायता दे रहा है, इसके लिए कई ब्रितानी विशेषज्ञ लीबिया जा रहे हैं.

लड़ाई जारी

ताज़ा ख़बर है कि मिसराता के कई इलाक़ों पर विद्रोहियों ने नियंत्रण हासिल कर लिया है और वे देश के पश्चिमी हिस्से की ओर बढ़ने के प्रयास कर रहे हैं जहाँ राजधानी त्रिपली सहित अधिकतर इलाक़ों पर कर्नल गद्दाफ़ी समर्थक सैनिकों का कब्ज़ा है.

मिसराता लीबिया का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और इसलिए भी उसकी अहमियत अधिक है क्योंकि वहाँ लीबिया का व्यापारिक बंदरगाह स्थित है.

मिसराता पर नियंत्रण के लिए पिछले कुछ समय से ज़ोरदार लड़ाई चल रही है, वहाँ से बड़ी संख्या में घायलों, बीमारों और विदेशी कामगारों को निकालकर बेनग़ाज़ी ले जाया गया है लेकिन अब भी अनेक आम नागरिक ज़ोरदार लड़ाई के बीच फँसे हुए हैं.

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