सिंगापुर के संस्थापक ने इस्तीफ़ा दिया

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Image caption ली कुआन यू 1965 में सिंगापुर की स्वतंत्रता के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री बने

सिंगापुर के संस्थापक और पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू ने मंत्रिमंडल में 50 साल तक बने रहने के बाद इस्तीफ़ा देने की घोषणा की है.

मंत्रिमंडल में एक सलाहकार का पद संभाल रहे ली ने अब देश का नेतृत्व अपने बेटे और प्रधानमंत्री ली सिएन लुंग को सौंप दिया है.

उन्होंने ये क़दम पिछले सप्ताह हुए चुनाव में उनकी पार्टी के 50 साल के शासन के दौरान अब तक के सबसे ख़राब प्रदर्शन के बाद उठाया है.

ली के नेतृत्व में पीपुल्स ऐक्शन पार्टी ने आठ बार चुनाव जीता और वे तीन दशकों तक सिंगापुर में सरकार के प्रमुख बने रहे.

पिछले सप्ताह हुए चुनाव में ली के बेटे दोबारा प्रधानमंत्री निर्वाचित होने में सफल रहे.

मगर उनकी पार्टी का वोट प्रतिशत घटकर 60 प्रतिशत रह गया.

ली कुआन यू के साथ-साथ उनके उत्तराधिकारी रहनेवाले पूर्व प्रधानमंत्री गोह चोक टोंग ने भी मत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की है.

नई पीढ़ी को ज़िम्मेदारी

दोनों नेताओं ने अपने साझा बयान में लिखा है – अब एक नई पीढ़ी का समय आ गया है.

87 वर्षीय ली 1959 से 1990 तक सिंगापुर के प्रधानमंत्री रहे थे.

1990 में उन्होंने ये दायित्व गोह चोक टोंग को सौंप दिया जो 2004 तक प्रधानमंत्री रहे.

दोनों नेता प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद भी मंत्रिमंडल में बने रहे.

दोनों ने सात मई को हुए चुनाव में अपनी सीटें भी जीती हैं.

लेकिन अब अपने इस्तीफ़े का एलान करते हुए उन्होंने लिखा है,"चुनाव के बाद हमने कैबिनेट छोड़ने का फ़ैसला किया है ताकि बिल्कुल युवा मंत्रियों की टीम नई पीढ़ी से संपर्क साध सके."

सिंगापुर की राजनीति में 1965 में आज़ादी के बाद से पीपुल्स ऐक्शन पार्टी का लगभग एकाधिकार रहा है.

सिंगापुर दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है लेकिन काम के लिए विदेशों से आनेवाले लोगों के कारण इस द्वीप की ग़रीब आबादी को संघर्ष करना पड़ रहा है.

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