बिनायक बनाम रमन सिंह

रमन सिंह
Image caption पीयूसीएल नें बिनायक सेन को योजना आयोग की समिति में शामिल किए जाने का स्वागत किया है.

मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन को योजना आयोग की एक समिति में शामिल किए जाने पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल ने आपत्ति व्यक्त की है और इसके विरोध में योजना आयोग की बैठकों का बहिष्कार करने का मन बना लिया है.

हालांकि इस फैसले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, मगर मुख्यमंत्री के सचिवालय से सूत्रों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की सरकार, खास तौर पर मुख्यमंत्री रमन सिंह को इस पर आपत्ति है.

रमन सिंह का कहना है कि चूँकि बिनायक सेन को छत्तीसगढ़ की निचली अदालत नें उम्र क़ैद की सजा सुनाई थी और वह अभी तक बरी नहीं किए गए हैं इसलिए सरकार को योजना आयोग की समिति में उनके शामिल करने पर आपत्ति है.

दरअसल योजना आयोग ने मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन को अपनी एक समिति के पैनल में शामिल किया है, जिसके तहत बिनायक 12वीं योजना के लिए स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर अपनी राय देंगे.

सरकारी सूत्रों का कहना है हालांकि आधिकारिक रूप से अभी तक छत्तीसगढ़ की सरकार नें इस मामले में अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कराई है मगर मुख्यमंत्री रमन सिंह प्रधानमंत्री से मिलकर उनसे इस मामले पर चर्चा करेंगे.

ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जब तक बिनायक सेन को समिति से हटाया नहीं जाता छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और मंत्री योजना आयोग की बैठकों का बहिष्कार करेंगे. अलबत्ता सरकारी अधिकारी बैठकों में हिस्सा लेते रहेंगे.

'दोषमुक्त नहीं'

उधर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया का कहना है कि बिनायक सेन को स्वास्थ्य मामलों पर राय देने के लिए समिति के बोर्ड में इसलिए जगह दी गई है क्योंकि उन्होंने एक लंबे अरसे तक आदिवासी इलाकों में कुपोषण के क्षेत्र में काम किया है.

अहलुवालिया का तर्क था कि 12वीं योजना के लिए बिनायक सेन की राय की ज़रूरत है.

छत्तीसगढ़ की सरकार में मंत्री राजेश मूणत का कहना है कि जब तक बिनायक सेन दोषमुक्त नहीं हो जाते, उन्हें सरकार की किसी भी समिति में रखना ठीक नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "अभी तो बिनायक सेन को सिर्फ़ ज़मानत मिली है. अभी उन्हें बरी या दोषमुक्त नहीं किया गया है. जिस पर देश द्रोह का आरोप हो उसे सरकार की समिति में रखना भी ग़लत है."

वहीं मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की कविता श्रीवास्तव का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट नें बिनायक सेन को ज़मानत देते हुए टिप्पणी कि थी कि उनके खिलाफ देश द्रोह का मामला नहीं बनता है.

उनका कहना है कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ़ उन्होंने उच्च न्यायलय में अपील दायर की है, इसलिए उन्हें मुजरिम करार नहीं दिया जा सकता.

पीयूसीएल नें बिनायक सेन को योजना आयोग की समिति में शामिल किए जाने का स्वागत किया है.

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