फ़ायरिंग में 12 फ़लस्तीन समर्थकों की मौत

इसराइल  सीमा इमेज कॉपीरइट Reuters

हज़ारों की संख्या में फ़लस्तीन समर्थकों ने इसराइल की 63 वर्षगांठ के मौके पर लेबनान,सीरिया और जॉर्डन की ओर से इसराइल की सीमाओं की तरफ़ मार्च किया.

इस मार्च को रोकने के लिए इसराइल की सेना ने लेबनान और सीरिया की सीमा पर फ़लस्तीनी प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई है.

लेबनान की सेना के अधिकारियों के मुताबिक इस फ़ायरिंग में दस प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और 120 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

उधर सीरिया की सीमा पर भी दो प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और 20 से ज़्यादा घायल हुए हैं.

फ़लस्तीनी 1948 में हुए इसराइल के गठन का विरोध दिवस मना रहे थे. इस मौके पर पश्चिमी तट, गज़ा व पूर्वी यरूशेलम और पड़ोसी जॉर्डन और लेबनान में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए.

सीरिया के सरकारी टेलीवीजन चैनल का कहना है कि ये प्रदर्शनकारी सीरिया से गोलन की पहाड़ियों की तरफ़ जाने की कोशिश कर रहे थे.

गोलन की पहाड़ियों पर इसराइल का क़ब्ज़ा है.

इसराइल की सेना का कहना है कि उसने सिर्फ़ चेतावनी देने के लिए गोलियाँ छोड़ी थीं.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption इसराइल का कहना है कि उसने सिर्फ़ चेतावनी देने के लिए गोलियाँ छोड़ी थीं.

इधर चिकित्सा कर्मचारियों का कहना है कि गज़ा के एरेज़ क्षेत्र में सेना की फ़ायरिंग में कम से कम 45 फ़लस्तीनी घायल हो गए हैं.

चिकित्सा कर्मचारियों ने कहा कि इसराइली टुकड़ियों ने प्रदर्शनकारियों पर मशीन गनों और टैंको से फ़ायरिंग की.

रमल्लाह में भी प्रदर्शनकारियों और सेना के बीच झड़पों की ख़बरे हैं. प्रदर्शनकारियों ने जवानों पर पथराव किया.

मिस्र की राजधानी काहिरा में भी इसराइली दूतावास के बाहर प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसु गैस के गोले छोड़ने पड़े.

नक़बा

फ़लस्तीनी इस दिन को 'नक़बा' या प्रलय की संज्ञा देते हैं. जबकि इसराइल में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया गया है.

इस अवसर पर फ़लस्तीनी छह दशक पहले हुए इसराइल के गठन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हैं. इसराइल के गठन के बाद हज़ारों फ़लस्तीनी बेघर गए थे.

इसराइल का गठन 1948 में हुआ था, जिसके बाद के सालों में उसने कई नए फ़लस्तीनी इलाक़ों पर कब्ज़ा कर लिया.

नए देश के गठन के बाद हुए संघर्षों के दौरान हज़ारों फ़लस्तीनियों को वहाँ से भागना पड़ा था.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दुनियाभर में 50 लाख फ़लस्तीनी शरणार्थी हैं. इनमें वो लोग भी शामिल हैं, जो परिवार के पलायन के बाद पैदा हुए है.

Image caption काफ़ी बैठकों के बाद भी ईसराईल-फ़लस्तीन का मसला नहीं सुलझ पाया है.

शुक्रवार को इसराइली सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में एक फ़लस्तीनी नवयुवक की मौत हो जाने से पहले से ही तनाव की ख़बरें थीं.

आरोप है कि नवयुवक की मौत सुरक्षाबलों की चलाई रबड़ की गोली लगने से हुई थी. पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा है.

इस बीच इसराइली पुलिस ने दावा किया है कि तेल अवीव में एक अरब ड्राइवर ने जान-बूझकर गाड़ी भीड़ भरी सड़क में घुसा दी जिसकी वजह से एक राहगीर की मौत हो गई है और कम से कम 10 घायल हैं.

नई आशा

पुलिस ने कहा है कि ट्रक ड्राइवर को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

ड्राइवर ने जान-बूझकर दुर्घटना करने की बात से इनकार किया है.

पश्चिमी तट से बीबीसी संवाददाता जॉन डॉनिसन का कहना है कि अरब क्षेत्र में प्रजातांत्र के लिए जारी संर्घष ने फ़लस्तीनियों के एक वर्ग में नई आशा जगाई है.

जॉन डॉनिसन मानते हैं कि हाल में गज़ा पट्टी में शक्तिशाली हमास और पश्चिमी तट का प्रशासनिक देख-रेख कर रहे गुट फ़तह के बीच हुई संधि से इसे और भी बल मिला है.

नागरिकों ने कहा है कि वो फ़लस्तीन को एक देश के तौर पर मान्यता दिलाने के लिए सितंबर में संयुक्त राष्ट्र जाएंगे.

संबंधित समाचार