गद्दाफ़ी के ख़िलाफ़ वारंट की तैयारी

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Image caption कर्नल ग़द्दाफ़ी के सैनिक अब भी विद्रोहियों पर हमले कर रहे हैं

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने कहा है कि वह लीबिया के शासक कर्नल गद्दाफ़ी, उनके बेटे सैफ़ अल इस्लाम और ख़ुफ़िया सेवा के प्रमुख अब्दुल्ला अल सनूसी के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी करने संबंधी प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है.

न्यायालय के मुख्य अभियोजक लुई मोरेनो ओकाम्पो का कहना है कि उनके पास इस बात के पूरे सबूत हैं कि इन तीनों लोगों ने आम नागरिकों पर हमले करने के आदेश दिए थे इसलिए उन पर मानवता के विरुद्ध अपराध के आरोप में मुक़दमा चलाया जा सकता है.

न्यायालय के जजों को सबूतों के आधार पर निर्णय करना है कि इन तीनों लोगों की गिरफ़्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी किए जा सकते हैं या नहीं.

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी के मुख्य अभियोजक ओकाम्पो ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तीन महीने पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके आईसीसी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था, आईसीसी से कहा गया था कि वह निष्पक्ष रूप से लीबिया में हुए अपराधों की जाँच करे, इसी जाँच के बाद आईसीसी ने अपनी रिपोर्ट आईसीसी के जजों को सौंप दी है.

इसी के साथ जजों से अनुरोध किया गया है कि इन सबूतों के आधार पर तीनों लोगों की गिरफ़्तारी का अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी किया जाए.

मुख्य अभियोजक ओकाम्पो ने कहा कि उन्हें इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि कर्नल गद्दाफ़ी ने निहत्थे और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के हिंसक दमन के आदेश ख़ुद दिए थे.

उन्होंने कहा, "इन लोगों ने आम नागरिकों पर उनके घरों में और सार्वजनिक स्थानों पर हमला करवाया, भीड़ पर गोलियाँ चलवाईं, अंतिम संस्कार के जुलूसों के रोकने के लिए भारी हथियारों का इस्तेमाल किया, मस्जिदों से बाहर निकल रहे लोगों पर निशाना साधकर गोलियाँ चलाई गईं, जो गद्दाफ़ी के नियंत्रण वाले इलाक़े हैं वहाँ ऐसी कार्रवाइयाँ अब भी चल रही हैं, गद्दाफ़ी के सैनिक विद्रोहियों की सूची बनाकर उन्हें त्रिपली की जेलों में डाल रहे हैं, उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, अनेक लोग ग़ायब हो गए हैं."

'प्रासंगिकता नहीं'

ओकाम्पो का कहना है कि कर्नल गद्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल इस्लाम के हाथ में देश की सेना की कमान है और वे एक तरह से देश के प्रधानमंत्री की तरह काम कर रहे हैं जबकि कर्नल गद्दाफ़ी के नज़दीकी रिश्तेदार अब्दुल्ला अल सनूसी कई हमलों के लिए ज़िम्मेदार हैं.

ओकाम्पो का कहना है कि कर्नल गद्दाफ़ी ने सत्ता में बने रहने के उद्देश्य से मानवता के प्रति गंभीर अपराध किए हैं, और ये अपराध जानबूझकर और सुनियोजित तरीक़े से किए गए हैं.

विद्रोहियों के नियंत्रण वाले बेनगाज़ी शहर से आम लोगों की प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं कि वे आईसीसी की पहल से ख़ुश हैं लेकिन कर्नल गद्दाफ़ी के नज़दीक लोगों का कहना है कि इस वारंट की कोई प्रासंगिकता नहीं है और वे इस पर ध्यान नहीं देंगे.

लीबिया के विदेश उप मंत्री ख़ालिद कै़म ने कहा कि "आईसीसी राजनीतिक रूप से शुरू से अफ्रीकी नेताओं को अपना निशाना बनाता रहा है और यही उसी के तहत की गई कार्रवाई है जिस पर अब अफ्रीकी यूनियन को फ़ैसला करना है, अफ्रीकी यूनियन पहले ही तय कर चुका है कि वह आईसीसी से नाता तोड़ रहा है".

ओकाम्पो ने जो सबूत जुटाए उन पर विचार करने के बाद जजों को निर्णय करना है कि वे इन तीन लोगों के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय वारंट जारी कर सकते हैं या नहीं, फ़िलहाल आपराधिक न्यायालय में मामले में आगे बढ़ने से कर्नल गद्दाफ़ी और उनके समर्थकों पर एक तरह का दबाव ज़रूर बढ़ेगा.

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