इतिहास के पन्नों से...

  • 18 मई 2011

यदि इतिहास के पन्नों में झांकें तो 18 मई को भारत ने जहां अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था, वहीं ब्रिटेन की पहली एस्ट्रॉनॉट अंतरिक्ष की यात्रा पर गईं:

1974: भारत का पहला परमाणु परीक्षण

Image caption इस परीक्षण को ‘स्माइलिंग बुद्धा’ का नाम दिया गया था.

18 मई 1974 के दिन राजस्थान के पोख़रण में अपने पहले भूमिगत परमाणु बम परीक्षण के साथ भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश बना था. इस परीक्षण को ‘स्माइलिंग बुद्धा’ का नाम दिया गया था.

साल 1972 में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर यानि बीएआरसी का दौरा करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वहां के वैज्ञानिकों को परमाणु परीक्षण के लिए संयंत्र बनाने की मौखिक इजाज़त दी थी.

परीक्षण के दिन से पहले तक इस पूरे ऑपरेशन को गोपनीय रखा गया था.

इस ऑपरेशन की अगुवाई बीएआरसी के निदेशक डॉक्टर राजा रामन्ना ने की और उनकी टीम में डॉक्टर अब्दुल कलाम भी शामिल थे.

1991: अंतरिक्ष में पहुंची पहली ब्रितानी

Image caption हेलेन एक चॉकलेट कंपनी में कैमिस्ट का काम करती थीं.

इसी दिन ब्रिटेन का पहली ऐस्ट्रॉनॉट हेलेन शर्मन ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी.

27 वर्षीय हेलेन सोवियत सोयुज़ नाम की अंतरिक्ष कैपसुल में बैठकर कज़ाख़स्तान से रवाना हुई और उनके साथ दो कॉस्मोनॉट भी मौजूद थे.

कैपसुल से एक किलोमीटर की दूरी से हेलेन की मां और बहन ने उन्हें अलविदा कहा.

दिलचस्प बात है कि हेलेन को अंतरिक्ष में जगह एक इश्तिहार में पूछे गए एक सवाल का जवाब देने पर मिली. इस इश्तिहार में लिखा था, ‘एस्ट्रॉनॉट चाहिए, अनुभवी न हो तो भी चलेगा.’

इससे पहले हेलेन एक चॉकलेट कंपनी में कैमिस्ट का काम करती थीं.

1950: अमरीका और यूरोप के बीच नेटो लक्ष्यों पर संधि

Image caption ब्रितानी विदेश मंत्री ने इसे एक एतिहासिक बैठक बताया.

उत्तरी एटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर करने के एक साल बाद इसी दिन विश्व के 12 देशों ने अमरीका और यूरोप की रक्षा के लिए एक स्थाई संगठन पर सहमति दी थी.

इस बाबत नेटो देशों की चौथी बैठक लंदन में हुई. 12 देशों के विदेश मंत्रियों के भाषण को दुनिया भर की मीडिया ने कवर किया.

इस बैठक के दौरान इन मंत्रियों ने नेटो के उद्देश्य और लक्ष्यों पर सहमति जताई और इन्हें लागू करने पर चर्चा की.

इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए तय किया गया कि एक स्थाई अध्यक्ष और दूसरे कर्मचारियों को नियुक्त किया जाएगा.

तय हुए संविधान में कहा गया कि किसी भी मसले को सुलझाने के लिए सेना के प्रयोग से पहले उसे राजनयिक तरीके से सुलझाया जाएगा.

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