`उसे यूँ ना जाना था'

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Image caption सऊदी अरब में बहुत से लोगों को ओसामा बिन लादेन से सहानूभूति है.

ओसामा बिन लादेन को बचपन से जानने वालों का मानना है कि ओसामा जैसा भी था उसे इस तरह से नहीं दफनाना चाहिए था.

सऊदी अरब की राजधानी जेद्दाह में ओसामा के बचपन के दोस्त ख़ालिद बतर्फ़ी याद करते हैं कि कैसे उन्होंने मोहल्ले में एक दिन फुटबॉल खेलते हुए ओसामा को एक लड़के से बचाया था जो उन्हें धक्का दे रहा था.

बतर्फी ने कहा " मुझे उम्मीद थी कि ओसामा मुझे शुक्रिया अदा करेगा लेकिन उसने मुझे बोला कि अगर तुम कुछ देर और ना आते तो मैं इससे खुद ही निपट लेता."

व्यापक सहानुभूति

बतर्फ़ी और ओसामा दोनों जेद्दाह के एक शांत इलाके में पले बढ़े थे. बाद के बरसों में ओसामा का मकान ढ़हा दिया गया और उसकी जगह पर अब एक छह मंजिला रिहायशी कॉम्प्लेक्स खड़ा है.

इस कॉम्प्लेक्स के एक फ़्लैट में किसी से मिलने आने वाले आगंतुक से जब ये पूछा कि वो जानते हैं कि इस कॉम्प्लेक्स की जगह पर पहले ओसामा का घर था तो वो बोले " मैं नहीं जानता और जानना भी नहीं चाहता."

वहीं एक दूसरे आगंतुक ने ओसामा की मौत पर खेद जताते हुए ओसामा को 'एक मुसलमान भाई' बताया. इस व्यक्ति के किशोर बेटे ने कहा कि, "ओसामा ने मुसलमानों के लिए अपना बलिदान दिया है उसे नहीं मारा जाना चाहिए था."

जेद्दाह में जहाँ आज भी लम्बे चौड़े बिन लादेन परिवार के बहुत सारे लोग रहते हैं वहां बहुत सारे लोगों को इस बात पर शक है कि बिन लादेन मारा गया है.

एक समुद्र तट के किनारे खड़ी एक बुर्कानशीं महिला का कहना था कि उन्हें ओसामा की मौत के सबूत नहीं चाहिए . इस महिला के अनुसार उसके शव के फोटो को जालसाजी से भी बनाया जा सकता है.

`अहंकारी ओसामा'

ओसामा 1980 के मध्य में बहुत सारे दूसरे सऊदी अरब के लोगों की तरह सोवियत संघ के खिलाफ़ जिहाद के लिए अफ़गानिस्तान चला गया. साल 1990 में सऊदी अरब में लौटने के बाद एक व्याख्यान देते हुए ओसामा ने भविष्यवाणी की कि सद्दाम हुसैन कुवैत पर हमला बोलेगें.

जमाल ख़शोगी जिन्होंने ओसामा के साथ अफ़गानिस्तान यात्रा की थी उन्होंने उस व्याख्यान के बाद ओसामा से पूछा कि वो कैसे ये बात दावे से कह सकता है तो ओसामा का उत्तर सुन ख़शोगी सुन चकित रह गए.

ओसामा ने कुरान की एक आयत सुना कर कहा " जो अल्लाह के लिए जिहाद करते हैं अल्लाह उन्हें सही रास्ता दिखाता है." ख़शोगी का कहना है कि इस उत्तर से वो समझ गए कि ओसामा का अहंकार कितना बड़ा है.

`निरर्थक मृत्यु'

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Image caption सऊदी अरब सरकार बिन लादेन की मृत्यु पर ज़्यादा नहीं बोलना चाहती.

बतर्फ़ी और ख़शोगी, ओसामा के दोनों दोस्त, बाद के सालों में ओसामा से अपना संपर्क खो बैठे.

बतर्फी मानते है कि. "अमरीका को ओसामा को गिरफ़्तार करना चाहिए था और असफल रहने पर कम से कम ठीक से उनका अंतिम संस्कार करना चाहिए था. किसी मुसलमान उलेमा को सही ढंग से प्रार्थना करते के बाद किसी भी ज़मीन पर उनके अंतिम संस्कार का वीडियों जारी किया जाना था."

ओसामा के बचपन के मित्र कहते हैं कि अमरीका बेशक ये ना बताता कि ये ज़मीन किस जगह है पर ओसामा को ज़मीन पर दफनाया जाना चाहिए था.

जमाल खशोगी मानते है, "ओसामा का संगठन और उसके विचार दोनों एक अंधे मोड़ पर पहुँच गए थे. ओसामा तहरीर चौक पर हार गया. वो अपने धर्म परिवार और खुद लिए ज़्यादा बेहतर कर सकता था अगर वो एक मध्यमार्गी रहता."

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता जनरल मंसूर सुलतान अल तुर्की, "ओसामा का सऊदी अरब पर प्रभाव इतना था कि उसने एक ऐसी विचारधारा विकसित की जो हमारे अनुसार अल क़ायदा जैसे चरमपंथी संगठनों के पीछे है."

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