राणा के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरु

  • 17 मई 2011
होटल ताज
Image caption चरमपंथियों ने मुंबई के कई प्रतीकों को निशाना बनाया था

पाकिस्तानी-कैनेडियन नागरिक तहाव्वुर राणा के ख़िलाफ़ शिकागो की एक अदालत में मुक़दमे की कार्यवाही शुरु हो गई है.

राणा पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों के लिए डेविड हेडली कोलमैन की सहायता की जिससे कि वह मुंबई में चरमपंथियों हमलों के लिए निशानों की तलाश कर सके.

इस हमले में कम से कम 166 लोग मारे थे. इनमें से कम से कम छह अमरीकी शामिल थे.

इन हमलों के बाद ही हेडली और राणा को गिरफ़्तार किया गया था.

पूछताछ में पता चला कि दोनों ही पाकिस्तान में साथ में रह चुके हैं.

सुनवाई

तहव्वुर राणा के ख़िलाफ़ मामले की शुरुआत डर्कसेन फ़ेडरल कोर्टहाउस में जूरी के चयन की प्रक्रिया के साथ शुरु हुई है.

इन जूरी सदस्यों को क़रीब 60 प्रश्नों का जवाब देना पड़ेगा जिससे यह पता चल सके कि वे इस्लाम आदि के बारे में क्या सोचते हैं.

Image caption राणा के ख़िलाफ़ सबसे अधिक बातें उनके पुराने दोस्त हेडली की ओर से ही आई हैं

राणा के वकील चार्ली स्विफ़्ट कहना है कि चूंकि ज़्यादातर अमरीकियों की राय मुसलानों के प्रति पूर्वाग्रह से भरी है इसलिए ये सुनिश्चित करना ज़रुरी है कि राणा को सही जूरी मिलें.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "जूरी में हमें ऐसे लोंगों की ज़रुरत है जो जाति और वंश के लिहाज से अलग-अलग हों और ऐसे पुरुष, स्त्री, युवा, बुज़ुर्ग हों जो अपनी भावनाओं को दरकिनार रखते हुए विश्वास और तर्क के आधार पर निर्णय दे सकें."

जबकि राणा के ही एक और वकील पैट्रिक बेलगेन ने कहा, "बहुत संभावना है कि भारत, पाकिस्तान या डेनमार्क का कोई व्यक्ति इस जूरी में शामिल न किया जाए."

माना जा रहा है कि इस सुनवाई के दौरान राणा से सवाल जवाब हों और इससे ये पता चल सकेगा कि मुंबई में हमलों की योजना किस तरह बनाई गई थी.

पाकिस्तान और आईएसआई

तहव्वुर राणा के ख़िलाफ़ इस मुक़दमे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस मामले में हेडली दोषी ठहराया जा चुका है लेकिन अभी राणा को दोषी नहीं ठहराया गया है.

राणा के पुराने मित्र हेडली ने अदालत को बताया था कि मुंबई हमलों के दो साल पहले से ही वह हमले की योजना पर काम कर रहा था और इसके लिए उसे पाकिस्तान के ताक़तवर ख़ुफ़िया एजेंसी के एक अधिकारी ने 25 हज़ार डॉलर की राशि भी दी थी.

हालांकि राणा अपने बयान में हेडली के इस बयान का खंडन करते हैं.

ये मामला ऐसे समय में शुरु हो रहा है जब पाकिस्तान को लेकर ये अहम सवाल उठाए जा रहे हैं कि अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में मौजूदगी का पता ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को किस तरह से नहीं था.

राणा के मामले से ये साबित हो सकता है कि आईएसआई का संबंध चरमपंथ से है और वह इसका भरपूर उपयोग भी करता है.

मुंबई हमलों के मामले में गिरफ़्तार राणा ने दावा किया था कि उसने पाकिस्तान सरकार और आईएसआई की ओर से 26/11 के हमलावरों को सामग्री आदि उपलब्ध करवाया.

यदि राणा दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है.

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