कूटनीति का नया अध्याय शुरूः ओबामा

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Image caption अरब देशों मे विद्रोहों के बाद ओबामा के इस भाषण को काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा था

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अरब देशों में हुए विद्रोहों से अमरीकी कूटनीति का एक नया अध्याय शुरू हुआ है.

अमरीकी विदेश विभाग में दिए गए अपने बहुप्रतीक्षित भाषण में ओबामा ने कहा कि अमरीका का भविष्य अर्थशास्त्र, सुरक्षा, इतिहास और नियति जैसे कारकों के कारण मध्य पूर्व से जुड़ा हुआ है.

उन्होंने कहा,"अमरीका की नीति होगी कि वो इस पूरे क्षेत्र में सुधारों और लोकतंत्र को प्रोत्साहन दे."

प्रेक्षकों का कहना है कि अरब जगत में व्याप्त विद्रोहों के बारे में ये ओबामा का पहला समग्र संबोधन है.

प्राथमिकता

ओबामा ने अपने संबोधन में कहा कि अमरीका की शीर्ष प्राथमिकता सारे उत्तर अफ़्रीका और मध्य पूर्व में सुधार को बढ़ावा देना और हिंसा तथा दमन का विरोध करना है.

ओबामा ने कहा,"हमारे सामने एक ऐतिहासिक अवसर है. एक मौक़ा है ये दिखाने का कि अमरीका ट्यूनीशिया के एक खोमचेवाले की गरिमा को वहाँ के एक तानाशाह की ताक़त से अधिक महत्व देता है."

अमरीकी राष्ट्रपति ने सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को भी सही ठहराया.

उन्होंने लोकतांत्रिक सुधारों को अपनानेवाले देशों - मिस्र और ट्यूनीशिया - के लिए नए सहायता पैकेजों का एलान किया.

फ़िलीस्तीनी संकट

ओबामा ने रूकी हुई इसराइली-फ़िलीस्तीनी शांति प्रक्रिया के बारे में भी टिप्पणी की.

उन्होंने कहा,"अंततः कोई क़ार्रवाई करना इसराइली और फ़िलीस्तीनियों के ही हाथ में है. उनपर कोई शांति थोपी नहीं जा सकती, ना ही अंतहीन विलंब से समस्या समाप्त हो जाएगी."

साथ ही उन्होंने कहा कि अमरीका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ये अवश्य कर सकता है कि वो ये बात कहे जो सब जानते हैं – कि स्थायी शांति दो तरह के लोगों के लिए दो राष्ट्र को बनाने से ही आ सकती है.

बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन की मौत के बाद राष्ट्रपति ओबामा मुस्लिम जगत के साथ एक नई शुरूआत करना चाहते हैं.

हालाँकि जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार मुस्लिम देशों में अमरीका के बारे में राय अभी भी अच्छी नहीं है.

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