टाटा ने अपने बयान का खंडन किया

  • 22 मई 2011
Image caption रतन टाटा का खंडन

टाटा समूह ने इस बात का खंडन किया है कि रतन टाटा ने ब्रितानी अख़बार "द टाइम्स" को दिए गए इंटरव्यू में ब्रितानी मैनेजरों की कार्य संस्कृति और मुकेश अंबानी के निवास पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी.

उनका कहना है कि यह इंटरव्यू दो महीने पहले लिया गया था और उस समय रतन टाटा ने अधिग्रहण के समय इन कंपनियों की प्रबंध संस्कृति का ज़िक्र किया था.

यह टिप्पणी आज के मैनेजरों के बारे में नहीं थी. उन्होंने अपनी पहले की कार्य शैली में काफ़ी परिवर्तन किया है.

टाटा समूह के प्रवक्ता का यह भी कहना है कि मुकेश अंबानी के बारे में भी उनकी टिप्पणी को ग़लत परिपेक्ष्य में और तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है.

रतन टाटा भारतीय समाज में बढ़ती असमानता के बारे में बात कर रहे थे.उनके शब्दों को जानबूझ कर सनसनीखेज बनाया गया है.

वह इस बारे में अख़बार को भी अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं.

इससे पहले "द टाइम्स" को दिए गए इंटरव्यू में टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा को कहते बताया गया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के प्रमुख मुकेश अंबानी का मुंबई में बना 27 मंज़िला घर 'एंटिला' इस बात का उदाहरण है कि अमीर भारतीयों की ग़रीबों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है.

लंदन के 'द टाइम्स' अख़बार को दिए इंटरव्यू में रतन टाटा ने कहा था कि,''मुझे ये देखकर हैरानी होती है कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है?''

रतन टाटा ने ये टिप्पणी अख़बार के भारत में आय की बढ़ती असमानता पर पूछे गए सवाल के जवाब में कही थी.

रतन टाटा ने ये भी कहा था कि जो व्यक्ति इतने महंगे घर में रह रहा हो, उसे अपने आसपास के माहौल के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए और ख़ुद से ये सवाल पूछना चाहिए कि क्या वो इसमें कुछ बदलाव ला सकता है? अगर ऐसा नहीं है तो ये दुख का विषय है क्योंकि भारत को ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो अपनी अकूत संपत्ति का कुछ हिस्सा लोगों की परेशानियों को कम करने के उपाय ढूंढने में लगाने को तैयार हों.

'द टाइम्स' को दिए इंटरव्यू में 73 वर्षीय रतन टाटा ने कहा था कि, ''भारत में अमीरों और ग़रीबों के बीच जो खाई है उसे कम करने के लिए हम बहुत कम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन चाहते ज़रूर हैं कि ये असमानता ख़त्म हो जाए.'

अख़बार के अनुसार ब्रिटेन की स्टील कंपनी 'कोरस' को 2006 और कार निर्माता कंपनी 'जगुआर लैंड रोवर' (जेएलआर) को 2008 में खरीदने वाले रतन टाटा ने ब्रिटेन के कारोबार प्रबंधकों के काम करने की शैली पर भी सवाल उठाए थे.

कोरस और जगुआर को खरीदने के बाद ब्रिटेन में मैनुफैक्चरिंग क्षेत्र में सबसे ज़्यादा रोज़गार देनेवाली कंपनी के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा था कि ब्रितानी मैनेजर भारतीय मैनेजरों की तरह लक्ष्य हासिल करने के लिए ज़रूरत से थोड़ा ज़्यादा काम करने में यक़ीन नहीं रखते.''

रतन टाटा ने भारत की कार्य संस्कृति की तारीफ़ करते हुए कहा था कि,''अगर भारत में आप किसी संकट में हैं, यानि आपको देर रात तक काम करने की ज़रूरत है तो लोग इसके लिए तैयार रहते हैं. जेएलआर के कामगार ऐसा करने को तैयार रहते हैं, लेकिन प्रबंधन ऐसा नहीं करता.''

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