भारत में भी पनप रहा है चरमपंथ

पी चिदंबरम
Image caption भारत में भी पनप रहा है चरमपंथ

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भारत की ज़मीन पर भी चरमपंथी संगठन पनप रहे हैं और पुणे में हुए हमले इसका उदाहरण हैं.

उनका कहना था कि शुरूआती दौर में भले ही सीमा पार से चरमपंथ का आग़ाज़ हुआ था लेकिन अब यहां भी कई चरमपंथी घटनाओं के उदाहरण मिलते हैं.

पुणे हमला इसका ताज़ा उदाहरण है.

चिदंबरम ने एक प्रेस कांफ्रेस में विभिन्न मुद्दों पर बात की.

फ्रांस में एक भारतीय की गिरफ़्तारी के बारे में भी उन्होंने सरकार की स्थिति स्पष्ट की.

उन्होंने बताया, ''दस मई को फ्रांस में जिस भारतीय की गिरफ़्तारी हुई, वे तमिलनाडु के हैं. हालंकि इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि उन्होंने भारत में किसी को जेहादी गतिविधियों के लिए भर्ती किया था या नहीं लेकिन वे भारत के जमीन पर ही चरमपंथ की ओर झुक गए थे.''

गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने आज इस गिरफ़्तारी पर पत्रकारों को और अधिक जानकारी देते हुए कहा कि उनका नाम मोहम्मद नियाज़ अब्दुल रशीद है.

चिदंबरम के अनुसार नियाज़ को फ्रांस की पुलिस ने 6 और संदिग्ध इस्लामी चरमपंथियों के साथ गिरफ्तार किया है.

पुलिस को संदेह है कि वो पाकिस्तान स्थित एक चरमपंथी संगठन के लिए भर्तियाँ कर रहे थे.

ये कहा जा रहा है कि नियाज़ अब्दुल रशीद ने ये माना कि वे एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे जो पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान में जेहाद के लिए लोगों की नियुक्ति कर रहे थे.

वे पढ़े लिखे हैं, मेकानिकल इंजिनियर हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि 21 साल की कम उम्र में वे सिमी से संबंधित एक संस्था से जुड़े जो तमिलनाडु स्थित है. वे 2008 में सबसे पहले फ्रांस पंहुचे.

वे तब तक एक प्रशिक्षत चरमपंथी बन चुके थे और थोड़े ही समय में उन्होने अपनी तरह के सोच वाले लोगों का एक गुट बना लिया था जिसमें चार फ्रांस के नागरिक थे जो मोरोक्को से आए थे, एक फ्रांसीसी नागरिक जो तुर्की मूल के हैं, एक पाकिस्तान मूल के और दो अन्य लोग थे.

जांच

गृह मंत्री ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच चल रही है और भारत, फ्रांस की पुलिस के साथ संपर्क में है. मोहम्मद नियाज़ अब्दुल रशीद फ्रांस रोज़गार की तलाश में गए थे और भारतीय खुफ़िया एजेंसियो के रडार पर भी वे थे.

इस प्रेस कान्फ्रेंस में इसके अलावा गृहमंत्री ने कर्नाटक के विषय पर भी सरकार के फ़ैसले की सफ़ाई दी.

गृहमंत्री ने कहा कि कर्नाटक राज्यपाल के राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफ़ारिश को इसीलिए ठुकरा दिया गया क्योंकि जो तथ्य संसदीय मामलों के कैबिनेट कमेटी के सामने रखे गए थे, वे धारा 356 लागू करने को न्यायसंगत नहीं ठहरा पा रहे थे.

इसीलिए ये निर्णय लिया गया कि वहां राष्ट्रपति शासन नहीं लागू किया जाएगा. हांलाकि गृहमंत्री ने राज्पाल के काम काम पर कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि उन्होंने अपना काम किया है.