'अब भी ज़िंदा हैं मुल्ला उमर'

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Image caption तालेबान के प्रवक्ता ने कहा कि मुल्ला उमर ज़िंदा हैं और अफ़ग़ानिस्तान में संगठन की कमान संभाले हुए हैं

अफ़ग़ानिस्तान के चरमपंथी संगठन तालिबान ने मुल्ला मोहम्मद उमर के पाकिस्तान में मारे जाने की ख़बरों का खंडन किया है.

तालिबान के प्रवक्ता ज़बिउल्ला मुजाहिद ने कहा कि मुल्ला उमर अब भी ज़िंदा है और अफ़ग़ानिस्तान में संगठन की कमान संभाले हुए हैं.

इस बीच भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सरकार को मुल्ला उमर के बारे में कुछ जानकारी थी लेकिन उनकी मौत की ख़बरों पर अभी इंतज़ार करना ही सही होगा.

विभिन्न मुद्दों पर हुई प्रेस कांफ्रेस में मुल्ला उमर के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा, '' हमें कुछ जानकारी थी लेकिन आज जो ख़बरें आई हैं वो मौत की हैं. इस बारे में इंतज़ार करना ही सही होगा.''

इससे पहले, अफ़ग़ानिस्तान के एक निजी समाचार चैनल ने दावा किया था कि अफ़ग़ान तालिबान के मुखिया मुल्ला उमर पाकिस्तान में एक ड्रोन हमले में मारे गए है.

ख़बरों के मुताबिक मुल्ला उमर क्वेटा से उत्तरी वज़ीरिस्तान जाते समय मारे गए.

हालांकि पाकिस्तान के एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि वो उमर के मारे जाने की ख़बर की पुष्टि नहीं कर सकते.

अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान

माना जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का नेतृत्व मुल्ला उमर के हाथों में है.

1980 में सोवियत संघ की सेना के साथ लड़ते हुए उनकी एक आँख चली गई थी.

मुल्ला उमर और उनके साथी अब तक पकड़ से बाहर हैं और माना जाता है कि वो ही तालिबान को दिशा निर्देश देते हैं.

2003 में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने लंदन के टाइम्स अख़बार को बताया था कि तालिबान नेता मुल्ला मोहम्मद उमर को पाकिस्तान के क्वेटा शहर में देखा गया था.

राष्ट्रपति करज़ई का कहना था कि उन्हें जानकारी मिली है कि मुल्ला उमर को क्वेटा की एक मस्जिद में देखा गया.

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