बेजान शरीर लेकिन बुलंद हौसले

  • 23 मई 2011
इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अपने कॉलेज के परिसर में मित्रों और शिक्षिका के साथ नेहा मेहरोत्रा

इस साल इलाहाबाद के सबसे बड़े स्कूल में सीबीएससी की परीक्षा में एक ऐसी लड़की ने टॉप किया है जो शरीर से पूरी तरह लाचार है.

नेहा मेहरोत्रा नाम की इस लड़की को बचपन में ही स्पाइनल मस्क्युलर डिस्ट्रॉफ़ी नामकी बीमारी हो गई जो लाइलाज मानी जाती है.

इस बीमारी की वजह से न तो वो उठ-बैठ सकती है और न ही अपनी जगह से हिल-डुल कर करवट बदल सकती है.

इसके बावजूद नेहा ने अपने कॉलेज में टॉप रैंकिंग हासिल कर एक मिसाल क़ायम की है.

नेहा की इस कामयाबी पर उसके दोस्त, परिवार वाले और कॉलेज के लोग ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे हैं.

नेहा ने 95.4 प्रतिशत नंबर हासिल करके दिखा दिया है कि भले ही उसके हाथ पैर न हिल सकते हों लेकिन उसका इरादा आसमान छूने का है.

नेहा की ये कामयाबी महज़ इत्तेफाक नही है.

दसवीं में उसने कॉलेज में तीसरा स्थान पाया था.

बचपन से ही स्पाइनल मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसी लाइलाज बीमारी की चपेट में आने की वजह से नेहा अपनी जगह से हिल भी नहीं सकती है.

किसे के बिठा देने पर वह कुछ देर के लिए तो बैठ सकती है लेकिन कुछ ही पलों में फिर से एक तरफ गिर जाती हैं.

उनके परिवार वालों का कहना है कि व्हील चेयर पर भी वह 20-25 मिनट से अधिक नहीं बैठ पातीं.

इसके बावजूद वह रोज़ाना कई घंटो तक पढ़ाई करने के बाद आज इस मक़ाम पर पहुँची हैं.

नेहा को 2006 में राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के हाथों 'राष्ट्रीय बाल श्री एवार्ड' मिला था.

अपनी इस कामयाबी से खुश नेहा अब आइएएस बनने की तैयारी में जुटना चाहती हैं.

शरीर से पूरी तरह लाचार नेहा की इस कामयाबी पर उसके कॉलेज के साथी, शिक्षक और बाक़ी लोग बहुत ख़ुश हैं.

हर किसी का यही कहना है कि नेहा की यह कामयाबी ख़ुद उनके और दूसरे लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

संबंधित समाचार