अफ़्रीका को अरबों डॉलर की मदद

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Image caption अफ़्रीका-भारत सम्मेलन में मनमोहन सिंह

अफ्रीकी देशों की छह दिन की यात्रा पर गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को अफ्रीका को अरबों डॉलर की मदद का ऐलान किया.

इथियोपिया की राजधानी अदिस अबाबा में दूसरे अफ़्रीका-भारत फ़ोरम सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अफ़्रीका की मदद के लिए अगले तीन साल में पांच अरब डॉलर का ऋण देगा. इसके साथ ही अफ़्रीका में नए संस्थानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को शुरू करने के लिए भी भारत 70 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक मदद देगा.

भारत ने अफ़्रीका के विकास में, ख़ासतौर से शिक्षा और आधारभूत ढांचे के विकास में मदद का आश्वासन दिया. विश्लेषकों का मानना है कि भारत, अफ़्रीका के प्राक़तिक संसाधन और बाज़ार तक पहुंच के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वी चीन से काफ़ी पीछे है

अफ़्रीका की क्षमता

अफ़्रीका-भारत फ़ोरम सम्मेलन में दिए भाषण में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा,''हम अफ़्रीका के साथ मिलकर उसकी क्षमता को विकसित करने की दिशा में काम करेंगे. हमें लगता है कि अफ़्रीका के विकास और वैश्विक मामलों में इसकी भागीदारी के लिए एक नए दृष्टिकोण की ज़रूरत है.''

इस मौक़े पर मनमोहन सिंह ने अफ़्रीका में भारतीय भागीदारी बढ़ाने के लिए अन्य कई योजनाओं की घोषणा की जिसमें इथियोपिया और जीबूती के बीच नई रेल लाइन के विकास के लिए 30 करोड़ डॉलर की सहायता शामिल है.

मनमोहन सिंह ने कहा,''मुझे ये एलान करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि भारत अफ़्रीका में आधारभूत ढांचे के विकास, क्षेत्रीय एकता, क्षमता के विकास और मानव संसाधन विकास की दिशा में की जा रही कोशिशों में अपनी मदद जारी रखेगा.''

मनमोहन सिंह ने कहा, ''मुझे लगता है कि 2008 से हमने जो कुछ भी हासिल किया है उस पर संतोष जताया जा सकता है, लेकिन हमारी जनता हमसे और भी बहुत कुछ चाहती है. हमें उनकी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए काफ़ी मेहनत करने की ज़रूरत है.''

आर्थिक केंद्र अफ़्रीका

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Image caption संबंध मज़बूत बनाने की कोशिश

उन्होंने कहा,''अफ़्रीका से आर्थिक विकास की नई कहानी उभर रही है. अफ़्रीका में वो सारी संभावनाएं मौजूद हैं जिससे वो वैश्विक आर्थिक विकास का एक बड़ा केंद्र बन सकता है. एचआईवी और एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में, साक्षरता का स्तर सुधारने, शिशु मृत्युदर घटाने और लोकतंत्र को मज़बूत बनाने के क्षेत्र काफ़ी काम हुआ है.''

मनमोहन सिंह ने पूरे अफ़्रीका में ई-नेटवर्क प्रोजेक्ट की क़ामयाबी के बाद एक भारत-अफ़्रीका वर्चुअल (आभासी) यूनिवर्सिटी की स्थापना का भी प्रस्ताव दिया. उनका कहना था कि इससे अफ़्रीकी छात्रों को भारतीय शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही उन्होंने इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय के तत्वावधान में 10 हज़ार नए वजीफ़े देने का भी प्रस्ताव दिया.

इस मौके पर मनमोहन सिंह ने 2008 घोषित लक्ष्यों को और आगे बढ़ाते हुए पूरे अफ़्रीका में कई नए संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव दिया जैसेकि भारत-अफ़्रीका खाद्य प्रसंस्करण समूह, भारत-अफ़्रीका एकीकृत कपड़ा समूह, माध्यमिक दूरी का भारत-अफ़्रीका मौसम विज्ञान केंद्र. भारत और अफ़्रीका के बीच कम विमान सेवाओं का हवाला देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र में तत्परता से काम करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि भारत की ये कोशिश रहेगी कि अगले तीन वर्षों में भारत के विभिन्न शहरों में अफ़्रीकी उड़ानों की संख्या बढ़े.

भारत और अफ़्रीका के बीच कारोबार बढ़ाने के लिए मनमोहन सिंह ने भारत-अफ़्रीका कारोबार परिषद की स्थापना का भी प्रस्ताव किया ताकि दोनों तरफ़ के बड़े कारोबारी एक-दूसरे के नज़दीक आ सकें.

2008 का सम्मेलन

पहला भारत-अफ़्रीका सम्मेलन 2008 में नई दिल्ली में हुआ था.

इस सम्मेलन के बाद से दोनों सहयोगियों के बीच कारोबार में बढ़ोतरी हुई है.

पिछले साल अफ़्रीका से भारत का आयात 20.7 अरब डॉलर का था जो कि 2009 के 18.7 अरब डॉलर के मुक़ाबले दो अरब डॉलर ज़्यादा था.

जबकि 2010 में भारत से अफ़्रीका को होनेवाला निर्यात 10.3 अरब डॉलर का था.