जैविक ईंधन से उड़ेंगे जहाज़

  • 25 मई 2011
हवाई जहाज़ इमेज कॉपीरइट AP
Image caption बीस सालों में जैविक ईंधन से चल सकते हैं हवाई जहाज़

आस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विज्ञान एजेंसी ने कहा है कि उड्डयन उद्योग में जैविक ईंधन का इस्तेमाल अगले बीस साल में संभव है. पूरी दुनिया के कार्बन उत्सर्जन का दो प्रतिशत हवाई जहाज़ो के कारण पैदा होता है.

आस्ट्रेलिया एक बड़ा देश है जहां हवाई जहाज़ की यात्रा ज़रूरी हो जाती है और वहां शोधकर्ता इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरह से सस्ते ईंधनों के विकल्प को तैयार किया जा सके. सिडनी में बुधवार को इस बाबत एक रिपोर्ट जारी की गई है.

आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक बहुत ज़ोर देकर कह रहे हैं कि उड्डयन उद्योग में अगर जैविक ईंधन का उपयोग किया जाए तो देश का ग्रीन हाउस उत्सर्जन 17 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है और इसके सालाना उर्जा की खपत को कम से कम दो अरब डालर तक कम किया जा सकता है.

'ग्रीन' विकल्प

ऐसी उम्मीद है कि ये ‘ग्रीन’ विकल्प दो दशकों के भीतर व्यवसायिक स्तर पर कारगर साबित हो जाएगा.

‘टिकाऊ उड्डयन ईंधन की दिशा’ नामक एक नई रिपोर्ट में साफ़ ईंधन तकनीक के क्षेत्र में होने वाले विकास पर विस्तृत चर्चा हुई है. इसमें बड़े उद्योग मसलन क्वांटस, बोईंग, एयर न्यूज़ीलैंड और रॉल्स रॉयस भी सहयोग कर रहा है.

कॉमनवेल्थ साइंटिफ़िक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च नामक संगठन में एक टीम इस पर काम कर रही है. इस संगठन में काम कर रहे अर्थशास्त्री पॉल ग्राहम का कहना है कि इस परियोजना की तरक्की ठीक दिशा में हो रही है.

पॉल कहते हैं, ''दुनिया के दूसरे क्षेत्र में भी लोग अपनी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं. आस्ट्रेलिया में हमारी स्थिती थोड़ी अलग है. हमारे पास बायोमॉस की कमी नहीं है और इसीलिए हम अपने हवाई जहाज़ जैविक ईंधन पर चला सकते हैं.कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में ये एक अहम क़दम है.''

बीबीसी संवाददाता फ़िल मर्सर के अनुसार कुछ जैविक ईंधनों की इस बात पर निंदा हो रही है कि वे ज़रूरी संसाधनों को कम कर रहे हैं. लेकिन आस्ट्रेलिया के मॉडल का आधार जंगल और शहर के कूड़े कचरे से ईंधन पैदा करना है. अतंरराष्ट्रीय उर्जा एजेंसी के अनुसार 2050 तक उड्डयन उद्योग की ज़रूरतों का तीस प्रतिशत जैविक ईंधन से पूरा होगा.