'ग़ैरक़ानूनी' गिरफ़्तारी के लिए मानहानि का दावा

  • 25 मई 2011
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न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्यदूतावास में कार्यरत एक अधिकारी की बेटी ने स्कूल में अपनी 'गैरकानूनी' गिरफ़्तारी के बाद मानहानि और हरजाना मांगने के लिए अदालती कार्रवाई शुरू कर दी है.

18 वर्षीय कृतिका बिस्वास के पिता देवशीष बिस्वास भारतीय वाणिज्यदूतावास में 'वाइस काउंसल' के पद पर काम करते हैं और उन्हें परिवार सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत राजनयिक छूट हासिल है.

कृतिका बिस्वास को इस साल आठ फ़रवरी के दिन न्यूयॉर्क के फ़ल्शिंग में जॉन बाउन स्कूल में जहां वह 12वीं कक्षा की छात्रा थीं, अपने अध्यापक और एक अध्यापिका जेमी किम रॉस को अश्लील ईमेल भेजने और उसमें धमकी भी देने के आरोप लगाए गए और गिरफ़्तार भी कर लिया गया.

लेकिन कृतिका बिस्वास ने अदालत में पेश शिकायती नोटिस या नोटिस ऑफ़ क्लेम में कहा है कि उनको स्कूल के प्रिंसिपल ने पुलिस बुलाकर गैरकानूनी तौर पर और गलत आरोप में गिरफ़्तार किया और 28 घंटों तक हिरासत में रखकर पूछताछ भी की गई.

'पुलिस ने एक ना सुनी'

इस दौरान वह बार-बार पुलिस वालों से कहती रही कि उनको राजनयिक छूट हासिल है और उनके पिता एक राजनयिक हैं, कम से कम उनको सूचित तो कर दिया जाए लेकिन उनकी एक न सुनी गई.

कृतिका का आरोप है कि उन्हें पुलिस ने हिरासत के दौरान न सिर्फ़ जकड़ कर हथकड़ियों से बांधे रखा था बल्कि शौच जाने तक की भी छूट नहीं दी और कहा गया कि, 'वहीं कमरे में ही करो जो करना हो.'

मंगलवार को कृतिका बिस्वास ने अपने वकील रवि बत्रा के साथ न्यूयॉर्क की 'सिटी काउंसिल' की इमारत के बाहर एक प्रेसवार्ता करके स्कूल प्रिंसिपल, शहर प्रशासन, शिक्षा विभाग और पुलिस कमिश्नर समेत पुलिसकर्मियों के खिलाफ़ आरोपों का खुलासा किया.

रवि बत्रा ने कहा, “कृतिका बिस्वास के खिलाफ़ जिस आधार पर यह कार्रवाई की गई उसमें लापरवाही के साथ-साथ आपराधिक साज़िश भी शामिल थी.”

रो पड़ीं कृतिका

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Image caption कृतिका का आरोप है कि उन्हें पुलिस ने हिरासत के दौरान हथकड़ियों में रखा.

कृतिका बिस्वास ने भी अपनी आप-बीती बयान करने की कोशिश की लेकिन वह बात करते करते रो पड़ी.

वकील रवि बत्रा ने बताया कि कृतिका बिस्वास को भारतीय वाणिज्य दूत प्रभू दयाल के हस्ताक्षेप के बाद छोड़ा गया. लेकिन बाद में उन्हें स्कूल से निलंबित कर एक समिति के समक्ष माता पिता समेत पेश होने को कहा गया.

इस पूरे मामले के दौरान कृतिका बिस्वास ने लगातार अपने को निर्दोष बताया लेकिन उसकी एक न सुनी गई.

और उसी बीच स्कूल के एक अन्य लड़के को वह ईमेल भेजने का ज़िम्मेदार पाया गया, लेकिन कृतिका बिस्वास के वकील का कहना है कि उसके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला नहीं चलाया गया है.

'असली अपराधी'

जब असली अपराधी का पता चल गया तो स्कूल ने भी कृतिका बिस्वास को वापस स्कूल में प्रवेश दे दिया. लेकिन अब वह इस स्कूल से परेशान हो गई है. और खुद उस गणित की अध्यापिका की भी बुराई करती है जिसने उसके खिलाफ़ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि कृतिका बिस्वास को उसकी हिंसक प्रवृति के कारण स्कूल के बच्चों से दूर रखा जाए.

कैलकुलस की अध्यापिका ने लिखा था कि वह अब कृतिका बिस्वास से दूर ही रहती है.

कृतिका बिस्वास के वकील का कहना है कि बिस्वास परिवार ने 15 लाख डॉलर के हरजाने का दावा किया है. वकील के मुताबिक ये परिवार अब तक जांच और अदालती कार्रवाई में 50 हज़ार डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है.

नोटिस नहीं मिला

लेकिन शहर के शिक्षा विभाग ने बीबीसी हिंदी को एक लिखित बयान में बताया है कि कृतिका बिस्वास मामले में अभी उन्हे किसी प्रकार का नोटिस नहीं मिला है.

शिक्षा विभाग की प्रवक्ता केट ओब्राएन ने कहा,“जब हमें औपचारिक तौर पर नोटिस मिलेगा तब हम उसका अध्ययन करके ही कोई प्रतिक्रिया दे सकेंगे.”

उधर स्कूल के प्रधानाचार्य हावर्ड कवैट, जिनके खिलाफ़ भी आरोप लगाए गए हैं, ने फ़ोन पर भी बात करने से इंकार किया और शहर के शिक्षा विभाग से बात करने को कहा.

कृतिका बिस्वास की ज़्यादातर पढ़ाई कोलकाता में हुई है और 2009 में ही वो इस स्कूल में दाख़िल हुई थीं. इस सारे मामले के कारण उसकी करीब एक महीने की पढ़ाई का नुकसान हुआ.

कृतिका बिस्वास ने कहा कि स्कूल ने उनसे अभी तक माफ़ी भी नहीं मांगी है, अब उनकी यह भी मांग है कि स्कूल के प्रधानाचार्य हावर्ड कवैट और उनकी गणित की अध्यापिका जेमी रॉस को भी बर्खास्त किया जाए.

इस बीच न्यूयॉर्क के भारतीय वाणिज्यदूतावास ने अमरीकी विदेश मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई है कि कृतिका बिस्वास को राजनयिक छूट होने के बावजूद प्रताड़ित करके गिरफ़्तार किया गया.

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