इसराइल रोड़े अटका रहा है: फ़लस्तीनी नेता

बेन्यामिन नेतन्याहू इमेज कॉपीरइट AP
Image caption नेतन्याहू इसराइल की सीमाओं के मुद्दे पर अड़े हुए हैं

अमरीकी संसद में इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू के फ़लस्तीन के बारे में दिए गए बयान को फ़लस्तीनी नेताओं ने ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि इससे क्षेत्र में शांति कायम नहीं होगी.

अमरीका का दौरा कर रहे इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने अमरीकी संसद को संबोधित करते हुए कहा था कि वे 'शांति कायम करने के लिए दुखदायी समझौते' करने के लिए भी तैयार हैं.

लेकिन उन्होंने इसके साथ ही कहा कि वे अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के 1967 के युद्ध से पहले की सीमाओं के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते हैं.

उधर इसराइली प्रधानमंत्री के बयान पर फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के प्रवक्ता नबील अबू रुदीन ने कहा, "जो नेतन्याहू के भाषण से सामने आया है उससे शांति कायम नहीं होगी. उसमें कुछ नया नहीं है सिवाए इसके कि वे भरोसेमंद, गंभीर, दीर्घकालिक और समग्र शांति के रास्ते में अवरोध खड़े कर रहे हैं."

फ़लस्तीन के मुख्य वार्ताकार साएब एराकात ने कहा कि नेतन्याहू के भाषण से साबित होता है कि इसराइल इस क्षेत्र में शांति कायम करने में भागीदार नहीं बन सकता है.

उनका कहना था कि नेतन्याहू वार्ताओं से पहले ही उनके नतीजों को थोपने की कोशिश कर रहे हैं.

बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता जेरेमी बोवन का कहना है कि नेतन्याहू के भाषण से स्पष्ट होता है कि उनके विचारों और फ़लस्तीनियों की सोच के बीच कितनी बड़ी खाई है.

नेतन्याहू ने अमरीकी संसद के दिए भाषण में कहा था, "इसराइल फ़लस्तीन के क्षेत्रफल के बारे में उदार होगा लेकिन सीमाओं के बारे में बहुत सख़्त होगा. महमूद अब्बास को इस्लामी पार्टी हमास के साथ हाल में किया गया समझौता रद्द कर देना चाहिए. इसराइल ऐसे लोगों के साथ समझौते की बात नहीं कर सकता जो उसके अस्तित्व को ही नहीं मानते."

लेकिन हमास के एक प्रवक्ता ने इसराइली प्रधानमंत्री की टिप्पणी को खारिज कर दिया है.

नेतन्याहू ने कहा है कि वे दो देशों के हल के बारे में प्रतिबद्ध हैं लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य में कोई भी सीमा वर्ष 1967 की इसराइल की सीमाओ जैसी नहीं हो सकती जिसकी रक्षा ही न की जा सके.

संबंधित समाचार