सरकारी इमारतों पर क़बाइलियों का क़ब्ज़ा

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Image caption यमन के हशीद क़बीले ने सरकारी इमारतों पर क़ब्ज़ा किया

यमन के सबसे शक्तिशाली क़बाइली समुदाय के सदस्यों ने राजधानी सना की कई सरकारी इमारतों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हशीद क़बीले के लड़ाकुओं और सुरक्षा बलों के बीच पिछले तीन दिनों से चल रही लड़ाई की वजह से सैकड़ों लोग शहर छोड़कर भाग रहे हैं.

ये लड़ाई तब शुरु हुई जब राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के वफ़ादार सैनिकों ने क़बीले के मुखिया के परिसर पर हमला किया.

इन झड़पों में कम से कम 44 लोग मारे जा चुके हैं.

उधर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद राष्ट्रपति सालेह अपना पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि 'उन्हे अपने वादे के मुताबिक तुरंत सत्ता हस्तांतरण करना चाहिए'.

'ग़लत फ़ैसला'

रिपोर्टों के अनुसार हशीद क़बीले के मुखिया शेख़ सादिक़ अल अहमार के वफ़ादार बलों ने हस्सबा इलाक़े में कई सरकारी इमारतों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.

इनमें गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय विमान सेवा की इमारत और सरकारी समाचार एजेंसी सबा का मुख्यालय शामिल हैं.

यमन में जारी संकट एक नए चरण में प्रवेश कर गया है.

पिछले कई महीनों से प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति सालेह के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे. वो देश में व्याप्त निर्धनता और भ्रष्टाचार के लिए उन्ही को दोषी मानते हैं.

यमन के शक्तिशाली क़बीले अब तक इस संघर्ष से अलग-थलग रहे हैं. उनकी तटस्थता भी श्री सालेह के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी. लेकिन अब स्थिति बदल गई है.

देश का सबसे शक्तिशाली क़बीला उनके ख़िलाफ़ हो गया है जबकि राष्ट्रपति स्वयं उस क़बीले के हैं.

इस सप्ताह जब सरकारी बलों ने कबीले के मुखिया शेख़ सादिक़ अल अहमार के परिसर में प्रवेश किया तो शेख़ ने अपने सैकड़ों सशस्त्र समर्थकों को गुहार लगाई और सना में भीषण लड़ाई छिड़ गई.

इससे ख़तरा ये है कि और क़बीले भी भड़क सकते हैं और देश गृहयुद्ध की चपेट में आ सकता है.

हालांकि राष्ट्रपति सालेह ने सरकारी इमारतों पर किए गए क़ब्ज़े को 'एक उकसाने वाली कार्रवाई कहा जिससे गृहयुद्ध छिड़ सकता है'.

राष्ट्रपति ने रॉएटर समाचार एजेंसी को बताया, "हम इस संघर्ष को और बढ़ाना नहीं चाहते. ये क़दम उन्होने उठाया है. इसतरह की हिंसा के साथ प्रशासन से भिड़ने का उनका फ़ैसला ग़लत था".

उन्होने कहा, "हम अल अहमार के लड़ाकुओं से कहते है कि वो सरकारी इमारतें छोड़ दें जिससे दोनों तरफ़ से लड़ाई ख़त्म हो सके".

लेकिन उन्होने पद छोड़ने से इंकार कर दिया.

श्री सालेह के एक प्रवक्ता अहमद अल सूफ़ी ने उनका एक बयान पढ़कर सुनाया जिसमें कहा गया, "मैं न सत्ता छोड़ूंगा और न ही यमन".

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