इतिहास में आज

  • 27 मई 2011

इतिहास के पन्नों में झांकें तो 27 मई 1964 में आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री और आधुनिक भारत के निर्माता जवाहरलाल नेहरु का निधन हुआ था. इसी दिन 1994 में उपन्यासकार अलेक्सांदर सोलज़ेनित्सिन की 20 साल के निर्वासन के बाद रूस में घर वापसी हुई.

1964: नेहरु का निधन

Image caption नेहरु की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई

वर्ष 1964 में 27 मई को आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री और आधुनिक भारत के संस्थापक के रूप में जाने जाने वाले जवाहर लाल नेहरु का निधन हुआ था.

नेहरु एक शाम पहले ही गर्मी की छुट्टियां मना कर लौटे थे. उनकी मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी के नाम पर विचारविमर्श शुरु हुआ.

गुलज़ारीलाल नंदा ने भारत के अंतरिम प्रधामंत्री के रूप में शपथ ली. अगले प्रधानमंत्री के रूप में नेहरु के नज़दीकी लाल बहादुर शास्त्री का नाम दावेदारों के रूप में सामने आया.

नेहरु ने अपने जीवनकाल में अपने उत्तराधिकारी के बारे में कोई संकेत नहीं दिया था.

उनकी मृत्यु से पांच दिन पहले जब एक पत्रकार वार्ता में उनसे इस बाबत पूछा गया तो नेहरु ने कहा था - 'मैंने इस बारे में सोचना तो शुरू किया है लेकिन मुझे ये नहीं लगता कि मेरी मौत जल्द होने वाली है.'

कैबिनेट मंत्री सी सुब्रमण्यम ने नेहरु के देहावसान की जानकारी संसद को दी.

नेहरु के निधन की ख़बर फैलते ही उनके घर के बाहर लाखों लोग एकत्र होने लगे और उनकी अंतिम यात्रा निकलने से पहले एक आकलन के अनुसार करीब ढाई लाख बच्चों महिलाओं और पुरुषों ने उनके अंतिम दर्शन किए.

1994: 20 साल बाद घर वापसी.

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Image caption सोलज़ेनित्सिन ने रूस की खराब हालत के लिए येल्तसिन को ज़िम्मेदार ठहराया था.

वर्ष 1994 में रूसी मूल के उपन्यासकार अलेक्सांदर सोलज़ेनित्सिन की अमरीका में 20 साल तक निर्वासन में रहने के बाद रूस में घर वापसी हुई थी.

सोवियत संघ के शासक जोसेफ़ स्टालिन ने सोलज़ेनित्सिन की नागरिकता 1974 में रद्द कर दी थी और उन्हें सोवियत संघ से बाहर निकाल दिया गया था.

स्टालिन सोलज़ेनित्सिन से उनके सत्ता विरोधी लेखन के कारण बेहद नाराज़ थे.

सोलज़ेनित्सिन को सोवियत संघ में प्रचलित गुलाग प्रथा के बारे में उनके लेखन को लेकर ख्याति मिली थी.

सोलज़ेनित्सिन की नागरिकता को 1990 में सोवियत संघ के अंतिम सर्वोच्च नेता मिखाईल गोर्बाचेव ने बहाल किया.

बीस साल तक अमरीका में निर्वासन का जीवन बिताने वाले सोलज़ेनित्सिन ने देश लौटने के बाद दो महीने तक ट्रेन से रूस में यात्रा की और आम लोगों से मुलाकत की.

रूस की हालत से दुखी और नाराज़ सोलज़ेनित्सिन ने रूस के पहले राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन के सामने 1998 में एक सम्मान स्वीकार करने से इंकार कर दिया.

वर्ष 2008 में 89 वर्ष की उम्र में सोलज़ेनित्सिन का निधन हो गया.

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