यमन में कितने सुरक्षित हैं भारतीय

यमन
Image caption यमन में जारी हिंसक तनाव के बीच रह रहे लगभग 14 हज़ार भारतीय सुरक्षित हैं

यमन में सोमवार से फिर भड़की हिंसा के बीच विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

हालांकि कूटनीतिक तौर पर इस विवाद को निपटाने के लिए कोशिशें जारी हैं, लेकिन इसी बीच अमरीकी दूतावास से ग़ैर ज़रूरी कर्मचारियों को वापस जाने के आदेश दे दिए गए हैं.

यमन में भारतीय समुदाय का आकार काफ़ी बड़ा है. ज्यादातर भारतीय सना में हैं, जहां गुरुवार को चौथे दिन भी राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के वफ़ादार सैनिकों और ताक़तवर कबायली गुट के बीच हिंसक झड़पें जारी हैं.

यमन की राजधानी सना से भारतीय राजदूत डॉ औसाफ़ सईद ने बीबीसी को बताया कि देश में मौजूद लगभग 14 हज़ार भारतीय सुरक्षित हैं.

उन्होंने बताया कि इनमें से लगभग 6 हज़ार भारतीय सना में हैं, और बाक़ी यमन के अन्य शहरों मे रहते हैं.

सभी भारतीय सुरक्षित

डॉ सईद ने बताया कि ज़्यादातर भारतीय चिकित्सा के क्षेत्र में कार्यरत हैं. इनमें अधिकतर केरल से आई नर्सें और डॉक्टर शामिल हैं.

उनका कहना था "सना के एक सैन्य अस्पताल में काम कर रही भारतीय नर्सों में घबराहट को देखते हुए अस्पताल ने ही उन्हें वहां से निकाल कर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया है."

डॉ सईद ने बताया कि कुछ नर्सें जो भारत वापस जाना चाहती हैं, उनकी स्वदेश वापसी के लिए उन अस्पतालों से संपर्क किया जा रहा है जहां वह काम करती हैं.

लेकिन उनका कहना था कि लगभग 95 फ़ीसदी नर्सों ने स्वदेश वापसी की इच्छा नहीं जताई है.

भारतीय राजदूत ने ये भी बताया कि मार्च के महीने में इस संघर्ष की शुरुआथ के समय भारतीय परिवारों को सलाह दी गई थी कि वह यमन से वापस चले जाएं.

मार्च में ही सना के एक भारतीय स्कूल को भी बंद कर दिया गया था जहां लगभग 6 सौ भारतीय बच्चे पढ़ते थे.

इसीलिए कई भारतीय परिवार तभी स्वदेश लौट गए थे.

नौकरी पेशा भारतीयों की सुरक्षा के सवाल के जवाब में डॉ सईद ने बताया कि जो लोग विदेशी कंपनियों में काम करते हैं, उन्हें कंपनियों की तरफ़ से छुट्टी दे दी गई है.

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