'पाक को ओसामा की जानकारी नहीं थी'

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Image caption हिलेरी क्लिंटन ने पाकिस्तान को साफ़ कहा कि वह अपनी समस्याओं के लिए अमरीका को दोषी ठहराना बंद करे

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि पाकिस्तान के उच्च अधिकारियों को ओसामा बिन लादेन के वहाँ होने की जानकारी थी.

पाकिस्तान की यात्रा पर पहुँची हिलेरी क्लिंटन ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी, राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और सेनाध्यक्ष जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी सहित सरकार के कई प्रमुख मंत्रियों से चर्चा की है.

इस चर्चा के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार को चरमपंथ से निपटने के लिए और क़दम उठाने की ज़रुरत है ताकि दुनिया विशेषकर पाकिस्तान चरमपंथ से सुरक्षित हो सके.

उन्होंने कहा, “हमने विस्तार से सभी मुद्दों पर चर्चा की है और चरमपंथ को ख़त्म करने केलिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई गई है. अमरीका बहुत कुछ कर रहा है और हम पाकिस्तान से कह रहे हैं कि वह भी ओर क़दम उठाए.”

उन के मुताबिक आल क़ायदा अब भी सबसे बड़ा ख़तरा है और इसको ख़त्म करने केलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बड़ी कोशिश करनी पड़ेगी.

इस यात्रा में उनके साथ अमरीकी सेना के प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन भी पहुँचे थे.

उल्लेखनीय है पहली और दूसरी मई की दरम्यानी रात अमरीकी सेना ने इस्लामाबाद से कुछ दूरी पर स्थित ऐबटाबाद में कार्रवाई करके अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था.

इसके बाद हिलेरी क्लिंटन की ये पहली पाकिस्तान यात्रा है.

ओसामा के मारे जाने के बाद से ये विवाद चल रहा था कि ये कैसे संभव है कि पाकिस्तानी सेना के प्रशिक्षण केंद्र से कुछ मीटर की दूरी पर ओसामा बिन लादेन पाँच साल से रह रहे हों और ये पाकिस्तानी अधिकारियों को पता न हो.

हालांकि इससे पहले एडमिरल माइक मुलेन भी कह चुके हैं कि पाकिस्तान के उच्च अधिकारियों को ओसामा की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी.

'आरोप से समस्या हल नहीं होगी'

हिलेरी क्लिंटन ने इस्लामाबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान और अमरीका के संबंध एक नए मोड़ पर हैं और अब चरमपंथ से निपटने के लिए पाकिस्तान को निर्णायक क़दम उठाने होंगे.

उनका कहना था कि पाकिस्तान की समस्याओं को अमरीका हल नहीं कर सकता.

उन्होंने कहा, "षडयंत्र की बातों से और अमरीका पर आरोप लगाने से पाकिस्तान की समस्याएँ ख़त्म नहीं होने वाली हैं."

अमरीकी विदेश मंत्री का कहना था कि पाकिस्तान की समस्याएँ हल करने के लिए पाकिस्तान के नेताओं को ही क़दम उठाने होंगे.

तनाव भरे रिश्ते

दोनों देशों के बीच ओसामा के ख़िलाफ़ ऐबटाबाद में कार्रवाई के बाद तनाव इसलिए बढ़ा क्योंकि पाकिस्तान ने किसी जानकारी के बिना उसकी भूमि पर अमरीकी कार्रवाई को 'संप्रभुता का उल्लंघन' कहते हुए इस पर आपत्ति जताई थी.

उधर अमरीका में अनेक राजनीतिक नेताओं ने इस बात पर आश्चर्य जताया था कि ओसामा बिन लादेन बिना किसी पाकिस्तानी अधिकारी या संस्था की जानकारी के इतने साल ऐबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य अकादमी के इतने नज़दीक कैसे रह सकते थे.

महत्वपूर्ण है कि गुरुवार को ही अमरीका की सेना ने पाकिस्तान से अपने कई सैनिकों को हटाने की घोषणा की थी. पेंटागन का कहना है कि पाकिस्तानी सरकार ने उससे अनुरोध किया है कि वह उनके देश में अपनी उपस्थिति को कम करे.

पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले दो सप्ताहों में पाकिस्तान ने अमरीकी सेना से कहा है कि वहाँ अपनी मौजूदगी को कम करे और अमरीका ने कुछ सैनिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला कर उनकी बात मान ली है. हालाँकि वापस बुलाए गए सैनिकों की संख्या काफ़ी कम है.

अमरीका के पाकिस्तान में 200 से ऊपर सैनिक हैं जो पाकिस्तानी सेना को प्रशिक्षण देने में सहायता दे रहे हैं. इनमें से ही कुछ सैनिक वापस लौटेंगे.

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