कौन है डेविड हेडली?

अदालत में गवाही देते हुए डेविड हेडली
Image caption डेविड हेडली पहले 29सितंबर को मुम्बई पर हमला करवाना चाहता था

अमरीका के शहर शिकागो में मुंबई हमलों के अभियुक्त तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ मुक़दमे में सबसे महत्त्पूर्ण गवाह और राणा के बचपन का दोस्त डेविड कोलमैन हेडली आख़िर है कौन?

भारत के लिए वह 2008 में मुंबई हमलों का षड्यंत्रकारी था. अमरीका के लिए 50 वर्षीय हेडली अमरीकी जेल में क़ैद एक ऐसा अभियुक्त है जो पाकिस्तान में अल-क़ायदा और दूसरे आतंकी लोगों को सज़ा दिलाने में गवाह बन सकता है.

हाल तक हेडली राणा का बचपन का दोस्त था और राणा के बच्चों के लिए एक मोहक चाचा.

लेकिन शिकागो में राणा के खिलाफ उसकी विस्तार से दी गई गवाही से असली हेडली का चेहरा बेनक़ाब होता है.

मुंबई के हमलों में न केवल उसका सहयोग रहा बल्कि उसके शब्दों में इन हमलों में वह पाकिस्तान में अपने चार सहयोगियों की तरह शुरू से आख़िर तक शामिल था. दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि वह ख़तरनाक आतंकवादियों की सूची में काफ़ी ऊपर था.

राणा के वकील चार्ली स्वि्फ़्ट के अनुसार वह एक चालबाज और धोखेबाज़ इंसान है. अदालत में उन्होंने कहा कि "हेडली एक चालाक धोखेबाज़ है जिसने राणा को बेवकूफ़ बनाया"

हेडली हाफ़िज़ सईद का चहेता

अगर हेडली की असलियत का किसी को सही मायने में अंदाजा था तो वह था पाकिस्तान का लश्कर-ए तैबा संगठन, जहां हेडली की पहुँच संगठन के प्रमुख हाफिज़ सईद तक थी.

लश्कर ने डेविड हेडली की भारत विरोधी भावनाओं का बहुत अच्छी तरह से फ़ायदा उठाया. उसका अमरीकी होना भी लश्कर के लिए फायदेमंद था.

इसके इलावा जिहाद में उसके दृढ विश्वास के कारण वह लश्कर के लीडरों का चहेता था. वह हाफ़िज़ सईद के साथ कई बार खाने पर जाया करता था.

भारत से नफरत करने वाले संगठन लश्कर के लीडर हाफ़िज सईद और ज़की उर रहमान लखवी 2002 से भारत में एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे. उन्होंने इसके लिए हेडली को चुना था.

2002 से 2006 तक उसे पहले कई बार तीन-तीन महीने की सैन्य ट्रेनिंग दी गई.

हेडली ने अदालत को बताया कि लश्कर के लोग मज़ाक में कहते थे कि वह चालीस वर्ष के होने के बाद भी इस ट्रेनिंग के लिए चुने गए हैं.

सैन्य ट्रेनिंग के बाद हेडली को मानसिक और आध्यात्मिक प्रशिक्षण के लिए कई कैंपों में भेजा गया.

लश्कर के हाफ़िज़ सईद, ज़की, साजिद मीर और आइएसआइ के मेजर इक़बाल ने 2006 में हेडली यानी दाउद गिलानी को अपना नाम बदलने का आदेश दिया. उसने अपने देश अमरीका में वापस आकर खुद को डेविड कोलमैन हेडली का नाम दिया और इस नाम से अमरीकी पासपोर्ट भी बनवाया.

अब उसकी मुसलमान या पाकिस्तानी (उसके पिता पाकिस्तानी और माता अमरीकी थी) होने की शिनाख़्त मिट चुकी थी.

अब हेडली मुंबई मिशन के लिए तैयार था लेकिन उसने अदालत को बताया कि उसे उस समय केवल यह बताया गया कि भारत में एक बड़े हमले के लिए उसे चुना गया है. उसने कहा कि 2007 में मुंबई मिशन की तैयारी शुरू हो गई थी.

बंदूकधारियों को कलावा पहनाने की सलाह

यहाँ हेडली को अपने बचपन के दोस्त राणा की ज़रुरत थी. राणा शिकागो में फर्स्ट वर्ल्ड नामी अप्रवासन की एक कंपनी चलाते थे. हेडली ने कहा कि उनके कहने पर राणा ने उसे इजाज़त दी कि वह इसकी एक शाखा मुंबई में खोल सकता है. इस कंपनी की आड़ में हेडली ने मुंबई की हर उस जगह की वीडियो उतारी और फोटो लिए जहाँ हमले होने थे.

इन जगहों के चयन की ज़िम्मेदारी हेडली की थी. उसी ने यह भी तय किया की हमला करने वाले दस बंदूकधारी समुद्र के रास्ते आकर मुंबई में कहाँ उतरेंगे.

मुंबई हमलों की तैयारी जिस बारीकी से की गई उसके पीछे भी हेडली का ही दिमाग़ था. बंदूकधारियों की कलाइयों में कलावा पहनाने का आइडिया भी हेडली का था जिन्हें उसने सिद्धिविनायक मंदिर से ख़रीदा था.

हेडली ने अदालत को बताया कि वह भारत से नफ़रत करता था. उसने कहा इस नफ़रत का कारण था भारत की मदद से 1971 की लड़ाई में पाकिस्तान की शिकस्त और बंगलादेश का जन्म. इस जंग में हेडली के स्कूल की इमारत भी भारतीय बमबारी से तबाह हो गई थी. "मैं उस समय पाकिस्तान में था और हमारी पीढ़ी के लोग उस बेईज़्ज़ती को भुला नहीं पाए थे", उस ने अदालत से कहा.

हेडली की अपने शब्दों में दी गई गवाही से यह साफ़ पता लगता है कि वह लश्कर का एक बड़ा सिपाही था जिसे ओहदे से अधिक जिहाद से मतलब था. वह आइएसआइ के मेजर इक़बाल का पसंदीदा शागिर्द था जो अपने इरादों से कभी पीछे हट नहीं सकता था.

हेडली एक समय में लश्कर का सब से अहम आदमी था. इक़बाले जुर्म करने और सरकारी गवाह बनने के बाद वह इस समय अमरीकी सरकार के लिए पाकिस्तान में आतंकवादियों तक पहुँचने का सब से अहम साधन बन गया है.

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