पेट्रोल के दाम बढ़े, सीएनजी व्यापारियों की चांदी !

सीएनजी लगी गाड़ी

पिछले ग्यारह महीनों में पेट्रोल के दाम सात बार बढ़े. कभी दो रुपए, कभी ढ़ाई रुपए तो कभी पांच रुपए से. नतीजा ये कि पेट्रोल वाहनों के मालिकों के बीच ईंधन का माध्य बदलने और सीएनजी (कंप्रैस्ड नैचुरल गैस) किट लगवाने की होड़ लग गई है.

पेट्रोल के मुकाबले सीएनजी में लगभग 70 प्रतिशत ईंधन की बचत होती है.

दिल्ली के एक जाने-माने सीएनजी किट विक्रेता के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी और एनसीआर क्षेत्र में हर महीने में कम से कम 5,000 गाड़ियों में सीएनजी किट लगवाई जाती है.

जहाँ सीएनजी पर्यावरण को कम प्रदूशित करती है वहीं इसका नकारात्मक असर भी हो रहा है. ऑटोमोबाइल निर्माताओं के बीच सीएनजी किट फ़िट करके उपभोक्ता को देने और सस्ती दरों पर सीएनजी उपलब्ध होने के कारण सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है.

'पेट्रोल वाहन चलाना व्यावहारिक नहीं रहा'

ऋषभ ने कुछ साल पहले अपनी मेहनत की बचत का इस्तेमाल कर गाड़ी ख़रीदने का अपना सपना पूरा किया.

उस समय पेट्रोल का दाम करीब 40 रुपए था, तो गाड़ी का रखरखाव उनकी जेब पर इतना भारी नहीं पड़ता था. लेकिन पेट्रोल के बढ़ते दाम से तंग आ कर अब उन्होंने अपनी गाड़ी में सीएनजी यानि कंप्रैस्ड नैचुरल गैस की किट लगवा ली है.

उनका कहना है कि पेट्रोल के बढ़ते दाम की वजह से वे अपनी गाड़ी चलाने का खर्चा नहीं उठा पा रहे हैं.

ऋषभ कहते हैं, "पेट्रोल के दाम महीना दर महीना बढ़ते जा रहे हैं. आज प्रति लीटर पेट्रोल का दाम करीब 65 रुपए पहुंच गया है, जिसकी वजह से मेरे लिए गाड़ी संभालना मुश्किल हो गया है. इसलिए काफ़ी सोच विचार के बाद मैं अपनी गाड़ी में सीएनजी किट लगवा रहा हूं. मुझे यकीन है कि सीएनजी लगवाने के बाद मैं बहुत बचत कर पाऊंगा."

पिछले ग्यारह महीनों में पेट्रोल के दाम सात बार बढ़े. कभी दो रुपए, कभी ढ़ाई रुपए तो कभी पांच रुपए से. नतीजा ये कि मध्यम-वर्गीय लोगों को अपनी गाड़ी को पेट्रोल पिलाना मुश्किल हो गया.

सीएनजी पेट्रोल से कहीं सस्ती है, जिसकी वजह से अब ज़्यादा से ज़्यादा लोग अपनी गाड़ियों में इंधन का माध्यम बदलने लगे हैं और अपनी पेट्रोल की गाड़ियों को सीएनजी में कनवर्ट करवा रहे हैं.

पेट्रोल के मुकाबले सीएनजी में लगभग 70 प्रतिशत ईंधन की बचत होती है. साथ ही इसे पर्यावरण के लिहाज़ से भी इसे एक बेहतर विकल्प माना जाता है.

व्यापारियों को दोगुना फ़ायदा

दिल्ली में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए, साल 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को आदेश दिया था कि राजधानी में सिर्फ़ कंप्रेस्ड नैचुरल गैस यानी सीएनजी से चलने वाली बसें ही चलाईं जाएं. इस आदेश के कुछ समय बाद ही दिल्ली में सभी सार्वजनिक यातायात के माध्यमों में सीएनजी लगवा दी गई.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश केवल सार्वजनिक यातायात के लिए था, लेकिन पेट्रोल के बढ़ते दामों की वजह से निजी वाहन भी अब तेज़ी से सीएनजी की ओर खिंचे चले आ रहे हैं.

दिल्ली के एक बड़े सीएनजी किट व्यापारी आशीष वोहरा का कहना है कि पेट्रोल के दाम बढ़ने से उनकी चांदी हो गई है.

आशीष ने बीबीसी को बताया, "हाल ही में पेट्रोल के दाम में जो इज़ाफ़ा हुआ है, उससे हमारे बिज़नेस में 110 से 125 प्रतिशत की बढ़त हुई है. आज के महंगाई के ज़माने में मध्यम वर्गीय लोग ही नहीं, बल्कि अमीर आदमी भी पेट्रोल पर हो रहे अपने खर्च को कम करना चाहता है. सीएनजी पैसा बचाने का एक अहम स्त्रोत बनता जा रहा है. हमारे पास हर वर्ग के लोग अपनी छोटी या बड़ी गाड़ियों में सीएनजी लगवाने आते हैं."

आशीष के मुताबिक दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रों (एनसीआर) में एक महीने में कम से कम 5,000 गाड़ियों में सीएनजी लगवाई जाती है.

लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि सीएनजी की तेज़ी से बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए क्या दिल्ली पूरी तरह से तैयार है?

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रों में गैस प्रबंधक इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटिड के प्रबंध निदेशक राजेश वेद व्यास का कहना है कि वे सीएनजी की बढ़ती मांग की आपूर्ती के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "हम दिन पर दिन सीएनजी की बढ़ती मांग के साथ चलने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं और जगह जगह नए सीएनजी स्टेशन खोल कर उसे लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे नहीं लगता कि सीएनजी की बढ़ती मांग को पूरा करने में कोई बाधा हमारे आगे है."

फ़िलहाल दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रों में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटिड के 214 गैस स्टेशन हैं, लेकिन लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए, जल्द ही 64 और गैस स्टेशन शहर में खुलने वाले हैं.

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटिड के आंकड़ों के मुताबिक़ साल 2005 में करीब 20,000 निजी वाहन सीएनजी का इस्तेमाल करते थे, लेकिन इस साल ये आंकड़ा 3 लाख तक पहुंच गया है.

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटिड के प्रबंध निदेशक राजेश वेद व्यास ने बताया कि पिछले पांच सालों में सीएनजी की बिक्री दोगुनी हो गई है, जिसमें से कंपनी को निजी वाहनों से बड़े पैमाने पर फ़ायदा हो रहा है.

उनका कहना था कि पेट्रोल के दाम बढ़ना उनकी कंपनी के लिए एक वरदान साबित हो रहा है.

ऑटोमोबाइल निर्माताओं में भी रेस

Image caption पर्यावरणविदों का कहना है कि सीएनजी की आसान उपलब्धता से ज़्यादा तादाद में लोग गाड़ियां ख़रीद रहे हैं.

सीएनजी की ओर लोगों कs बढ़ते रुझान की वजह से अब मारुति, टोयोटा और ह्यूनडाई जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियां भी सीएनजी लगी हुई गाड़िया बनाने लगी हैं.

मारुति के कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन के प्रमुख पुनीत धवन ने बीबीसी को बताया कि मारुति ने पिछले साल सीएनजी कारों के मॉडल निकाले, जिसके बाद से ज़्यादातर ग्राहक उन्हीं गाड़ियों की मांग कर रहे हैं.

उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सीएनजी किट लगी गाड़ियों की मांग में कम से कम 20 प्रतिशत बढ़ोतरी देखने को मिली है.

अप्रत्यक्ष दुष्प्रभाव

सीएनजी लोगों की जेब पर पेट्रोल की तरह भारी तो नहीं पड़ती और साथ ही पर्यावरण के लिए भी इसे अच्छा माना जाता है. लेकिन सस्ते इंधन की उपलब्धि होने से शहर में निजी गाड़ियों की तादाद भी बढ़ गई है.

दिल्ली के स्थानीय ट्रांस्पोर्ट ऑफ़िस के आंकड़ों के मुताबिक़ दिल्ली की सड़कों पर हर महीने करीब 12,500 नई गाड़ियां उतरती हैं.

ऐसे में पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय ये है कि सस्ते इंधन की उपलब्धता होने से गाड़ियों की जो तादाद बढ़ती जा रही है, उसका नतीजा ये है कि शहर में ट्रैफ़िक की दिक्कत बढ़ती जा रही है.

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट की वातावरण प्रदूषण विभाग की अध्यक्ष अनुमिता रॉयचौधरी का कहना है कि हालांकि सीएनजी एक ग्रीन इंधन है लेकिन इस पर लगे कम टैक्स का फ़ायदा कार चालकों तक इतनी आसानी से नहीं पहुंचना चाहिए.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “चूंकि आज बाज़ार में सीएनजी सबसे सस्ता इंधन है, तो ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसकी ओर खिंचे चले आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से सीएनजी के सस्तीकरण का फ़ायदा निजी कार चालकों को नहीं मिलना चाहिए. बल्कि सस्तीकरण का मक़सद सार्वजनिक यातायात के साधनों को बढ़ावा देना होना चाहिए. आज सीएनजी के सस्ते होने से जो निजी गाड़ियों की इस इंधन पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, उसका नतीजा ये है कि शहर में जगह जगह सड़कों पर भारी टैफ़िक जाम देखने को मिल रहा है. सरकार को चाहिए कि सीएनजी लेने वाली निजी गाड़ियों पर अलग से एक टैक्स लगाया जाए, जिससे कि लोग सार्वजनिक यातायात के साधनों में सफ़र करने के लिए प्रोत्साहित हों.”

सीएनजी के अपने ही फ़ायदे हैं, लेकिन पर्यावरण को मिले इस वरदान का दूसरा पहलू भी उतना ही भयावह है. दिल्ली शहर में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने हर दिन कम से कम आधा घंटा ट्रैफ़िक को दुहाई देते हुए न बिताया हो.

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