फीफा के दो अधिकारी निलंबित

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Image caption एथिक्स कमिटी के पेटरस ने फीफा के फैसलों की घोषणा की

दुनिया भर में फुटबॉल की नियामक संस्था फीफा ने अपनी कार्यकारी समिति के दो सदस्यों को घूस लेने के आरोप में निलंबित कर दिया है.

फीफा की एथिक्स कमिटी ने ज्यूरिख में बैठक की और बैठक में पाया कि एशियन फुटबॉल के प्रमुख मोहम्मद बिन हम्माम और कैरेबियाई फुटबॉल के प्रमुख जैक वार्नर की जवाबदेही बनती है.

हम्माम और वार्नर के ख़िलाफ़ अब जांच शुरु होगी.

इस मामले में वार्नर के दो सहयोगियों डेबी मिगुएल और जैसन सिलवेस्टर को भी निलंबित किया गया है.

कमिटी में फीफा के वर्तमान प्रमुख सैप ब्लैटर के ख़िलाफ़ भी घूस लेने संबंधी आरोप की जानकारी नहीं देने के संबंध में सुनवाई की थी लेकिन उन्हें क्लीन चिट दी गई है.

प्यूत्रो रिको फुटबॉल संघ ने आरोप लगाया था कि उनके प्रतिनिधियों को चालीस हज़ार डॉलर की रिश्वत दी गई थी कि वो अगर बुधवार को फीफा के प्रमुख के लिए होने वाले चुनावों में वो हम्माम को अपना वोट दें.

इन चुनावों में अब सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार हैं और वो हैं सैप ब्लैटर. एथिक्स कमिटी की सुनवाई से पहले ही हम्माम ने चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था.

ज्यूरिख में एथिक्स मामलों की कमिटी में सुनवाई के दौरान फीफा के उपाध्यक्ष वार्नर और हम्माम से कड़ी पूछताछ की गई. इन दोनों पर कार्यकारी समिति के सदस्य चक ब्लेज़र ने घूस देने के आरोप लगाए थे.

माना जाता है कि इन दोोनं ने कैरेबियाई फुटबॉल यूनियन को दस और 11 मई के दिन पैसों का प्रस्ताव दिया था.

ये रिश्वत हम्माम को अध्यक्ष बनाने के लिए थी जिसके तहत बुधवार को चुनाव में प्रतिनिधियों को हम्माम के पक्ष में वोट देना था.

जब यह मामला सामने आया तो हम्माम ने बयान दिया कि ब्लैटर को इस मामले की जानकारी थी लेकिन उन्होंने भी यह बात एथिक्स कमिटी को नहीं बताई और ये भी फीफा नियमों का उल्लंघन है.

इससे पहले फीफा के दो और कार्यकारी सदस्यों रिकार्डो टेक्सियेरा और वोरावी माकुदी पर भी रिश्वत देने के आरोप लगे थे लेकिन जांच के बाद उन्हें दोषी नहीं पाया गया.

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