माल्टा में तलाक़ पर रज़ामंदी

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Image caption रोमन कैथलिक बहुल माल्टा में कैथलिक चर्च के अभियान के बावजूद तलाक़ के पक्ष मे सहमति हुई

माल्टा में तलाक़ को क़ानूनी क़रार दिए जाने पर सहमति हो गई है.

बहसंख्यक रोमन कैथलिक आबादी वाले भूमध्यसागरीय देश माल्टा मे शनिवार को हुए जनमतसंग्रह का उद्देश्य यह तय करना था कि माल्टा में तलाक़ को क़ानूनी रूप से वैध क़रार दिया जाए या नहीं.

माल्टा की लगभग तीन चौथाई आबादी ने देश में तलाक़ को क़ानूनी मान्यता देने के पक्ष में वोट दिया है.

तलाक़ को क़ानूनी मान्यता देने संबंधी इस जनमत संग्रह में लगभग 72 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया.

वैटिकन सिटी के अलावा फ़िलीपिन्स और माल्टा ही दुनिया के दो ऐसे देश हैं जहां तलाक़ लेने या देने की इजाज़त नहीं है.

शनिवार को हुए जनमत संग्रह के नतीजों की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री डॉ लॉरेंस गौंज़ी ने कहा कि वे ऐसे नतीजों की आशा तो कर रहे थे, लेकिन बहुमत की राय का सम्मान किया जाएगा.

ग़ौर तलब है कि दुनिया भर में वैटिकन सिटी के अलावा फ़िलिपीन्स और माल्टा ही दो ऐसे देश हैं जहां तलाक़ प्रतिबंधित है.

यूरोपीय संघ में माल्टा एकमात्र ऐसा देश है जहां तलाक़ नहीं है

इससे पहले सन 2004 में चिली वह आख़िरी देश था जिसने तलाक़ को क़ानूनी मान्यता दी थी.

तलाक़ के विरोध में प्रचार अभियान चलाने वाले डॉ गौंज़ी ने कहा, "हालांकि जनमत संग्रह का नतीजा वह नहीं रहा जो मैं चाहता था लेकिन अब हमारा ये फ़र्ज़ बनता है कि जनता की इच्छा का सम्मान किया जाए."

उनका कहना था कि अब ये संसद की ज़िम्मेदारी है कि वह संसद में अध्यादेश लाकर तलाक़ संबंधी क़ानून लाए.

तलाक़ पर बहस

माल्टा के बेहद प्रभावशाली कैथलिक चर्च ने देश में तलाक़ के ख़िलाफ़ वोट देने के लिए प्रचार अभियान चलाया था.

लेकिन अब सत्ताधारी नैशनलिस्ट पार्टी के नेता और तलाक के समर्थकों के ख़ेमे की अगुआई कर रहे जैफ़री पुलिसिनो ओर्लांदो ने जनमत संग्रह के नतीजों को महत्वपूर्ण फ़ैसला बताया है.

पिछले साल जैफ़री पूलिसिनो ऑरलांदो ने एक दूसरे सांसद के साथ मिलकर एक प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश किया था जिसमें तलाक़ का प्रावधान था.

लेकिन प्रधानमंत्री लॉरेंस गौंज़ी ने इस पर जनमत-संग्रह कराने का निर्णय ले लिया.

इस फ़ैसले के बाद तलाक़ के समर्थक और विरोधियों में बहस शुरू हो गई है.

जनमत संगर्ह के नतीजों पर संतोष जताते हुए और्लांदो ने कहा "इस फ़ैसले से माल्टा में एक नए युग की शुरुआत हुई है जहां चर्च और राष्ट्र दोनों की अलग हैसियत होगी."

इससे पहले माल्टा में तलाक़ वैधानिक नहीं था.

शादी शुदा जोड़े या तो अदालत के ज़रिए क़ानूनी अलगाव की मांग कर सकते थे या फिर चर्च से शादी को रद्द करवा सकते थे.

तीसरा विकल्प था विदेश जाकर वहां के क़ानून के तहत तलाक़ हासिल करना, जिसे माल्टा में वैधता हासिल थी.

लेकिन अब नए क़ानून के तहत माल्टा के दंपत्तियों को वैवाहिक संबंध में दरार पड़ने के चार साल बाद तलाक़ की इजाज़त मिल जाएगी.

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