नेपाली जनभावना का सम्मान करे भारत: प्रधानमंत्री खनाल

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नेपाल के प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल ने भारत से अपील की है वो नेपाली जनता की भावनाओं का सम्मान करे.

प्रधानमंत्री खनाल ने कहा, "नेपाल की स्वतंत्रता, सार्वभौम सत्ता और राष्ट्रीय अखंडता को नेपाली जनता बहुत अनमोल मानती है. (भारत को) इसका सम्मान करना है और दो देशों के बीच संबंध को बहुत गहरा और व्यवस्थित बनाकर आगे बढ़ना होगा."

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संविधान सभा का कार्यकाल तीन महीने के लिए बढ़ाए जाने के बाद बीबीसी हिंदी सेवा से प्रधानमंत्री खनाल ने विशेष बातचीत में ये बात कही.

उन्होंने संविधान सभा की समय सीमा तीन महीने तक बढ़ाए जाने को एक अनमोल मौक़ा बताया है और कहा है कि माओवादियों ने जिस तरह क्रमिक रूप से अपने रुख़ में लचीलापन दिखाया है, दूसरी पार्टियों को भी वैसा ही लचीलापन दिखाना होगा तभी देश में शांति प्रक्रिया सफल हो सकती है.

प्रधानमंत्री ने कहा है कि अगर नेपाल की राजनीतिक पार्टियाँ एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती रहेंगी तो ये नेपाल की तीन करोड़ जनता का दुर्भाग्य होगा.

'अनमोल समय'

झलनाथ खनाल नेपाल की एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी पार्टी के नेता हैं और नेपाली संसद में सबसे ज़्यादा सदस्यों वाली माओवादी पार्टी के समर्थन से सरकार चला रहे हैं.

लंबी कशमकश के बाद राजनीतिक पार्टियों के बीच रविवार की सुबह पाँच बिंदुओं पर आपसी सहमति बनी जिसके आधार पर संविधान सभा का कार्यकाल एक बार फिर तीन महीने के लिए बढ़ाया गया है.

इस समझौते के मुताबिक़ तीन महीने के भीतर शांति प्रक्रिया का प्रमुख काम पूरा कर लिया जाना चाहिए, नए संविधान का पहला मसौदा तैयार हो जाना चाहिए, मधेशी समुदाय के साथ पहले हुए समझौतों को लागू किया जाए और नेपाली सेना में तराई के लोगों की भर्ती हो, संसद का समय तीन महीने के लिए बढ़ाया जाए और राष्ट्रीय सरकार के गठन के लिए प्रधानमंत्री इस्तीफ़ा दें.

संविधान सभा का कार्यकाल बढ़ा

प्रधानमंत्री खनाल ने बीबीसी से बातचीत में इस बात को ग़लत बताया कि वो इस्तीफ़ा देने से इंकार कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "मैने इस्तीफ़ा देने के लिए इंकार नहीं किया है. मैं इस्तीफ़ा देने को तैयार हूँ पर किसके लिए इस्तीफ़ा देना चाहिए? राष्ट्रीय सहमति के लिए इस्तीफ़ा ज़रूरी है तो सबसे पहले राष्ट्रीय सहमति का विकल्प तैयार कीजिए. इसके तैयार होते ही एक मिनट, एक सेकेंड के भीतर मैं इस्तीफ़ा देने को तैयार हूँ."

कशमकश

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Image caption एमाले पार्टी के झलनाथ खनाल माओवादियों के समर्थन से प्रधानमंत्री बने.

लंबी राजनीतिक कशमकश का प्रमुख कारण विपक्षी नेपाली काँग्रेस की ये माँग थी कि माओवादियों को ताले में बंद हथियारों की चाबी सरकार को सौंप देनी चाहिए. माओवादी इसके लिए तैयार नहीं थे.

प्रधानमंत्री झलनाथ खनाल ने संविधान सभा के कार्यकाल को तीन महीने बढ़ाए जाने को एक सकारात्मक विकास बताया है और कहा है कि शांतिप्रक्रिया और संविधान निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए ये अनमोल समय है.

उन्होंने कहा, "विभिन्न दलों में सिर्फ़ सत्ता में रहने और सत्ता के लिए संघर्ष करने की प्रवृत्ति ही शांति और संविधान निर्माण में सबसे बड़ी बाधक रही है. इससे मुक्त होकर सब राजनीतिक पार्टियाँ आगे बढ़ेंगी तो तीन महीने में भारी प्रगति होगी."

प्रधानमंत्री ने कहा है कि प्रमुख पार्टियों को एक होकर चलना होगा. "इतिहास ने आपके कंधे पर जो दायित्व रख दिया है उसे समझदारी, एकता और पहलकदमी के साथ निर्वाह करना होगा."

खनाल ने स्पष्ट रूप से कहा, "नेपाल में दर्जनों पार्टियाँ हैं और नेपाल की जनता इस बात पर नज़र रखती है कि कौन देश के लिए काम करता है और कौन विदेशी ताक़तों के इशारे पर."