'उत्सर्जन घटाना है तो परमाणु ऊर्जा ज़रूरी'

  • 31 मई 2011
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भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर देश में परमाणु ऊर्जा की हिमायत की है. मनमोहन सिंह ने कहा है कि अगर भारत को उत्सर्जन स्तर कम रखना है तो उसे परमाणु ऊर्जा और ऊर्जा के ग़ैर पारंपरिक स्रोतों का मिलाजुला मॉडल इस्तेमाल करना होगा.

भारत दौरे पर आईं जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में मनमोहन सिंह ने दिल्ली में कहा कि भारत इस बात का ध्यान ज़रूर रखेगा कि परमाणु ऊर्जा के उत्पादन में सुरक्षा इंतज़ामों का पूरा-पूरा ध्यान रखा जाए.

उन्होंने कहा कि अभी भारत की ऊर्जा का तीन फ़ीसदी हिस्सा ही परमाणु ऊर्जा से आता है और 2020 तक बीस हज़ार मेगावाट की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है.

अभी एक दिन पहले ही जर्मनी ने घोषणा की है कि वो अपने सभी परमाणु ऊर्जा केंद्रों को वर्ष 2022 तक बंद कर देगा.भारत के एक दिन के दौरे पर आईं जर्मन चांसलर जब मीडिया से रूबरू हुईं तो उनसे पूछा गया कि क्या वो परमाणु ऊर्जा की भारत की नीति का समर्थन करती हैं.

इस पर एंगेल मर्केल ने कहा कि जर्मनी ने भी बरसों तक ऊर्जा के मामले में मिश्रित मॉडल अपनाया है जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल थी.

उनका कहना था, “हमने परमाणु ऊर्जा केंद्र बंद करने का फ़ैसला किया है लेकिन जर्मनी परमाणु ऊर्ज इस्तेमाल करता रहा है. इसके साथ-साथ हम ग़ैर पारंपरिक स्रोतों पर भी ध्यान देते हैं. भारत भी यही कर रहा है. इस तरह के व्यापक और मिलेजुले एनर्जी मॉडल को अपनाने में जर्मनी भारत का समर्थन करता है.”

जर्मनी बड़ा निवेशक

इस वर्ष भारत और जर्मनी के कूटनीतिक रिश्ते स्थापित होने की 60वीं वर्षगाँठ हैं. जर्मन चांसलर को दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाज़ा गया.

मनमोहन सिंह और एंगेला मर्केल की मुलाक़ात में पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, पश्चिम एशिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मुद्दे पर भी चर्चा हुई.

भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद ऐसी गंभीर समस्या है जिसे हर मोर्चे पर लड़ने की ज़रूरत है न कि चुनिंदा मोर्चों पर. जबकि चांसलर मर्केल का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान पर भारत और जर्मनी मिलकर काम कर रहे हैं.

आईएमएफ़ के नए प्रमुख के मुद्दे का ज़िक्र तो पत्रकार वार्ता में नहीं हुआ पर एंगेला मर्केल ने ये ज़रूर कहा कि जर्मनी चाहता है कि वैश्विक नियम कायदे ऐसे हों ताकि विकासशील और विकसित देश दोनों के लिए लाभदायक हों.

एंगेला मर्केल के दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक, विज्ञान और शोध के क्षेत्रों में कई समझौते हुए हैं. उनके साथ कई मंत्रियों समेत एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आया है.

भारत के लिए जर्मनी की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार जर्मनी है. जर्मनी भारत में सबसे बड़े निवेशकों में से भी एक है. वहीं जर्मनी का भी भारत से व्यापारिक हित जुड़ा हुआ है. भारत को अरबों डॉलर के फ़ाइटर जेट बेचने के इच्छुक देशों में जर्मनी का नाम भी शामिल है.

फ़िलहाल दोनों के बीच सालाना करीब 15 अरब यूरो का कारोबार होता है और 2012 तक इसे 20 अरब यूरो करने का लक्ष्य है.

जर्मनी ने विरोध जताया

उधर जर्मनी ने एंगेला मर्केल के हवाई जहाज़ को ईरान की वायूसीमा में दाखिल ना होने देने पर अपना विरोध जताया है. गौरतलब है कि भारत आ रही मर्केल के जहाज़ को ईरानी अधिकारियों ने अपने देश की वायूसीमा में दाख़िल होने की अनुमति नहीं दी.

इस वजह से चांसलर मर्केल के हवाई जहाज़ को दो घंटे तक तुर्की के आसमान में चक्कर लगाने पड़े. उसके बाद कहीं जाकर ईरान जहाज़ को अपनी सीमा में प्रवेश की इजाज़त दी.

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